<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-7189779905817347363</id><updated>2011-12-31T02:17:22.492-08:00</updated><category term='kamla surayya das'/><category term='muslim'/><category term='support'/><category term='prem'/><category term='प्रो. बी. एन. पाण्डेय'/><category term='hindi'/><category term='writer'/><category term='नेस्ले'/><category term='चिपलूनकर'/><category term='बादशाह'/><category term='उर्दू युनिकोड'/><category term='amanat'/><category term='hindu'/><category term='इतिहास'/><category term='बनारस'/><category term='मुसलमान'/><category term='औरंगज़ेब'/><category term='उमर कैरानवी'/><category term='हिन्दी यूनीकोड'/><category term='nestle'/><category term='new muslim women'/><category term='sewa'/><title type='text'>mera tajarba</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://meratajarba.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7189779905817347363/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://meratajarba.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>Umar Kairanvi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00958476404864434157</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SXlfeinhAII/AAAAAAAAAEA/oKeD8XaDgi4/S220/umarkairanvi1.jpg'/></author><generator version='7.00' 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माफ़ी माँगता हूँ जिसने मानव जगत के सब से बड़े शैतान (राक्षस) के बहकावे में आकर आपकी सबसे बड़ी दौलत आप तक नहीं पहुँचाई उस शैतान ने पाप की जगह पापी की घृणा दिल में बैठाकर इस पूरे संसार को युद्ध का मैदान बना दिया। इस ग़लती का विचार करके ही मैंने आज क़लम उठाया है कि आप का अधिकार (हक़) आप तक पहुँचाऊँ और निःस्वार्थ होकर प्रेम और मानवता की बातें आपसे कहूँ। &lt;br /&gt; वह सच्चा मालिक जो दिलों के भेद जानता है, गवाह है कि इन पृष्ठों को आप तक पहुँचाने में मैं निःस्वार्थ हूँ और सच्ची हमदर्दी का हक़ अदा करना चाहता हूँ। इन बातों को आप तक न पहुँचा पाने के ग़म में कितनी रातों की मेरी नींद उड़ी है। आप के पास एक दिल है उस से पूछ लीजिये, वह बिल्कुल सच्चा होता है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक प्रेमवाणी &lt;br /&gt;यह बात कहने की नहीं मगर मेरी इच्छा है कि मेरी इन बातों को जो प्रेमवाणी है, आप प्रेम की आँखों से देखें और पढें। उस मालिक के लिए जो सारे संसार को चलाने और बनाने वाला है ग़ौर करें ताकि मेरे दिल और आत्मा को शांति प्राप्त हो, कि मैंने अपने भाई या बहिन की धरोहर उस तक पहुँचाई, और अपने इंसान होने का कर्तव्य पूरा कर दिया। &lt;br /&gt; इस संसार में आने के बाद एक मनुष्य के लिए जिस सत्य को जानना और मानना आवश्यक है और जो उसका सबसे बड़ा उत्तरदायित्व और कर्तव्य है वह प्रेमवाणी मैं आपको सुनाना चाहता हूँ &lt;br /&gt;प्रकृति का सबसे बड़ा सत्य &lt;br /&gt; इस संसार बल्कि प्रकृति की सब से बड़ी सच्चाई है कि इस संसार सृष्टि और कायनात का बनाने वाला, पैदा करने वाला, और उसका प्रबन्ध चलाने वाला सिर्फ और सिर्फ अकेला मालिक है। वह अपने अस्तित्व (ज़ात) और गुणों मे अकेला है। संसार को बनाने, चलाने, मारने, जिलाने मे उसका कोई साझी नहीं। वह एक ऐसी शक्ति है जो हर जगह मौजूद है, हर एक की सुनता है और हर एक को देखता है। समस्त संसार में एक पत्ता भी उसकी आज्ञा के बिना नहीं हिल सकता। हर मनुष्य की आत्मा की आत्मा इसकी गवाही देती है चाहे वह किसी भी धर्म का मानने वाला हो और चाहे मुर्ति पूजा करता हो मगर अन्दर से वह यह विश्वास रखता है कि पालनहार, रब और असली मालिक केवल वही एक है। &lt;br /&gt; मनुष्य की बुद्धि में भी इसके अतिरिक्त कोई बात नहीं आती कि सारे सृष्टि का मालिक अकेला है यदि किसी स्कूल के दो प्रिंसपल हों तो स्कूल नहीं चल सकता, एक गाँव के दो प्रधान हों तो गाँव का प्रबंध नष्ट हो जाता है किसी एक देश के दो बादशाह नहीं हो सकते तो इतनी बड़ी सृष्टि (संसार) का प्रबंध एक से ज्यादा खुदा या मालिकों द्वारा कैसे चल सकता है, और संसार के प्रबंधक कई लोग किस प्रकार हो सकते हैं? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक दलील &lt;br /&gt;कुरआन जो ईश्वरवाणी है उसने संसार को अपने सत्य ईश्वरवाणी होने के लिए यह चुनौती दी कि ‘‘अगर तुमको संदेह है कि कुरआन उस मालिक का सच्चा कलाम नहीं है तो इस जैसी एक सुरह (छोटा अध्याय) ही बनाकर दिखाओ और इस कार्य के लिए ईश्वर के सिवा समस्त संसार को अपनी मदद के लिए बुला लो, अगर तुम सच्चे हो। (सूर: बकरा, 23) &lt;br /&gt; चैदह सौ साल से आज तक इस संसार के बसने वाले, और साइंस कम्पयूटर तक शोध करके थक चुके और अपना अपना सिर झुका चुके हैं किसी में भी यह कहने की हिम्मत नहीं हुई कि यह अल्लाह की किताब नहीं है। &lt;br /&gt; इस पवित्र किताब में मालिक ने हमारी बुद्धि को समझाने के लिए अनेक दलीलें दी हैं। एक उदाहरण यह हैं। ‘‘अगर धरती और आकाश में अनेक माबूद (और मालिक) होते तो ख़राबी और फ़साद मच जाता‘‘। बात साफ है अगर एक के अलावा कई मालिक होते तो झगड़ा होता। एक कहता अब रात होगी, दूसरा कहता दिन होग। एक कहता कि छः महीने का दिन होगा। एक कहता सूरज आज पश्चिम से निकलेगा, दूसरा कहता नहीं पूरब से निकलेगा अगर देवी, देवताओं का यह अधिकार सच होता और यह वह अल्लाह के कार्यां में शरीक भी होते तो कभी ऐसा होता कि एक दास ने पूजा अर्चना करके वर्षा के देवता से अपनी बात स्वीकार करा ली, तो बड़े मालिक की ओर से ऑर्डर आता कि अभी वर्षा नहीं होगी, फिर नीचे वाले हड़ताल कर देते। अब लोग बैठे हैं कि दिन नहीं निकला, मालूम हुआ कि सूर्य देवता ने हड़ताल कर रखी है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सच्ची गवाही &lt;br /&gt;सच यह कि संसार की हर चीज गवाही दे रही है यह भली भॉति चलता हुआ सृष्टि का निज़ाम (व्यवस्था) गवाही दे रहा है कि संसार का मालिक अकेला और केवल अकेला है। वह जब चाहे और जो चाहे कर सकता है। उसको कल्पना और ख़्यालों में नहीं लाया जा सकता, उसकी मूर्ति नहीं बनाई जा सकती। उस मालिक ने सारे संसार को मनुष्य की सेवा के लिए पैदा किया। सूरज इंसान का सेवक, हवा इंसान की सेवक, यह धरती भी मनुष्य की सेवक है, आग पानी जीव जन्तु, संसार की हर वस्तु मनुष्य की सेवा के लिए बनाई गयी हैं। इंसान को इन सब चीजों का सरदार (बादशाह) बनाया गया है, तथा सिर्फ अपना दास और अपनी पूजा और आज्ञा पालन के लिए पैदा किया है। &lt;br /&gt; न्यायोचित और इंसाफ की बात यह है कि जब पैदा करने वाला, जीवन देने वाला, मारने वाला, खाना पानी देने वाला और जीवन की हर एक आवश्यक वस्तु देने वाला वह है तो सच्चे इंसान का अपना जीवन और जीवन से सम्बन्धित तमाम वस्तुएं अपने मालिक की मर्जी से, ओर उसका आज्ञाकारी होकर प्रयोग करनी चाहिये। अगर एक मनुष्य अपना जीवन उस अकेले मालिक की आज्ञा पालन में नहीं गुज़ार रहा है तो वह इंसान नहीं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक बड़ी सच्चाई &lt;br /&gt;उस सच्चे मालिक ने अपने सच्चे प्रन्य, कुरआन मे एक सच्चाई हम को बताई है। &lt;br /&gt; अनुवाद: हर एक जीवन को मौत का मज़ा चखना है। फिर तुम्हें हमारी ओर पलट कर आना होगा। (सुरः अनकबूत 58) &lt;br /&gt; इस आयत के दो भाग हैं। पहला यह है कि हर धर्म, हर जानदार को मौत का मज़ा चखना है। यह ऐसी बात है कि हर धर्म, हर समाज और हर जगह का आदमी इस बात पर यक़ीन रखता है बल्कि जो धर्म को मानता भी नहीं वह भी सच्चाई के आगे सिर झुकाता है और जानवर तक मौत की सच्चाई को समझते हैं। चूहा बिल्ली को देखकर भागता है और कुत्ता भी सड़क पर आती हुई किसी गाड़ी को देखकर भाग उठता है। इसलिए कि इन की मौत का यक़ीन (विश्वास) है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मौत के बाद &lt;br /&gt;इस आयत के दूसरे भाग में कुरआन मजीद एक बड़ी सच्चाई की तरफ हमें आकर्षित करता है यदि वह इंसान की समझ मे आ जाये तो सारे संसार का वातावरण बदल जाये। वह सच्चाई यह है कि तुम मरने के बाद मेरी तरफ़ लौट जाओगे और इस संसार में जैसे भी कार्य करोगे वैसा बदला पाओगे। &lt;br /&gt; मरने के बाद तुम गल सड़ जाओगे और दोबारा पैदा नही किये जाओगे ऐसा नहीं है। न ही यह सत्य है कि मरने के बाद तुम्हारी आत्मा किसी योनि में प्रवेश कर जायेगी। यह दृष्टिकोण किसी मानवीये बुद्धि की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। &lt;br /&gt; पहली बात यह है कि आवागमण का यह दृष्टिकोण वेदों में उपलब्ध नहीं है। बाद के पुराणों में इसका उल्लेख है उस से ज्ञात होता है कि इंसान के शुक्राणुओं पर लिखे सन्तानों के गुण पिता से पुत्र ओर पुत्र से उसके पुत्र में जाते हैं। इस धारणा का आरम्भ इस तरह हुआ कि शैतान (राक्षस) ने धर्म के नाम पर लोगों को ऊँच नीच में बांध दिया। धर्म के नाम पर शुद्रों से सेवा लेने और उनकों नीच समझने वाले धर्म के ठेकेदारों से समाज के दबे कुचले लोगों ने जब यह सवाल किया कि जब हमारा पैदा करने वाला ईश्वर है उसने सब इंसानों को आँख, कान, नाम हर चीज में बराबर बनाया है तो आप लोगों ने अपने आप को बड़ा और हमें नीचा क्यांे बनाया। इसके लिए उन्होंने आवागमन का सहारा लेकर यह कह दिया कि तुम्हारे पिछले ज़न्म के कर्मो ने तुम्हें नीच बनाया है। &lt;br /&gt; इस धारणा के अन्तर्गत सारी आत्मायें दोबारा पैदा होती हैं। और अपने कर्मो के हिसाब से योनि बदलकर आती है। अधिक कुकर्म करने हैं। उनसे अधिक कुकर्म करने वाले वनस्पति की योनि में चले जाते हैं, और जिसके कर्म अच्छे होते है वह मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आवागमन के तीन विरोधी &lt;br /&gt;तर्क (दलीलें) &lt;br /&gt;इस क्रम मे सबसे बड़ी बात यह है कि सारे संसार के विद्वानों और शोध कार्य करने वाले साइंस दानों का कहना है कि इस धरती पर सबसे पहले वनस्पति जगत ने जन्म लिया। फिर जानवर पैदा हुए और उसके करोड़ों वर्ष बाद इन्सान का जन्म हुआ। अब जबकि इंसान अभी इस धरती पर पैदा ही नही हुए थे और किसी इन्सानी आत्मा ने अभी बुरे कर्म नहीं किए थे तो किन आत्माओं ने वनस्पति और जानवरों के शरीर में जन्म लिया? &lt;br /&gt;दूसरी बात यह है कि इस धारणा का मान लेने के बाद यह मानना पड़ेगा कि इस धरती पर प्राणियों की संख्या में लगातार कमी होती रहे। जो आत्मायें मोक्ष प्राप्त कर लेंगी। उनकी संख्या कम होती रहनी चाहिये। अब कि यह तथ्य हमारे सागने है कि इस विशाल धरती पर इन्सान जीव जन्तु और वनस्पति हर प्रकार के प्राणियों की जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। &lt;br /&gt;तीसरी बात यह है कि इस संसार में जन्म लेने वालों और मरने वालों की संख्या में ज़मीन आसमान का अन्तर दिखाई देता है। मरनेवाले मनुष्य की तुलना में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या कहीं अधिक है। कभी-कभी करोड़ो मच्छर पैदा हो जाते है जब कि मरने वाले उससे बहुत कम होते है। कहीं-कहीं कुछ बच्चों के बारे में यह मशहूर हो जाता है कि वह उस जगह को पहचान रहा है जहा वह रहता था, अपना पुराना, नाम बता देता है। और यह भी कि वह दोबारा जन्म ले रहा है। यह सब शैतान और भूत-प्रेत होते हैं जो बच्चों के सिर चढ़ कर बोलते है और इन्सानों के दीन ईमान को खराब करते हैं। &lt;br /&gt;सच्ची बात यह है कि यह सच्चाई मरने के बाद हर इन्सान के सामने आ जायेगी कि मनुष्य मरने के बाद अपने मालिक के पास जाता है, और इस संसार मे उसने जैसे कर्म किये है उनके हिसाब से सज़ा अथवा बदला पायेगा। &lt;br /&gt;कर्मो का फल मिलेगा &lt;br /&gt;यदि वह सतकर्म करेगा भलाई और नेकी की राह पर चलेगा तो वह स्वर्ग में जायेगा। स्वर्ग जहाँ हर आराम की चीज़ है। और ऐसी-ऐसी सुखप्रद और आराम की चीज़ें है जिनकों इस संसार में न किसी आँख ने देखा, न किसी कान ने सुना, और न किसी दिल में उसका ख़्याल गुजारा। और सबसे बड़ी जन्नत (स्वर्ग) की उपलब्धि यह होगी कि स्वर्गवासी लोग वहॉ अपने मालिक के अपनी आँखों से दर्शन कर सकेंगे। जिसके बराबर विनोद और मजे़ कोई चीज नहीं होगी। &lt;br /&gt; इस प्रकार जो लोग कुकर्म (बुरे काम) करेंगे, पाप करके अपने मालिक की आज्ञा का उल्लंघन करेंगे, वह नरक मे डाले जायेगे, वह वहॉ आग में जलेंगे। वहॉ उन्हें हर पाप की सज़ा और दंड मिलेगा। और सब से बड़ी सजा यह होगी कि वह अपने मालिक के दर्शन से वंचित रह जाऐगे। और उन पर उनके मालिक का अत्यन्त क्रोध होगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ईश्वर का साझी बनाना &lt;br /&gt;सबसे बड़ा पाप है &lt;br /&gt;उस सच्चे मालिक ने अपने कुरआन में हमें बताया कि नेकियों, सतकर्म, पुण्य ओर सदाचार छोटे भी होते हैं और बड़े भी इसी प्राकर उस मालिक के यहॉ गुनाह, कुकर्म, पाप भी छोटे बड़े होते हैं उसने हमें बताया है कि जो पाप हमें सब से अधिक सज़ा का भागीदार बनाता है, और जिसको वह कभी क्षमा नही करेगा, और जिस का करने वाला सदैव नरक में जलता रहेगा, ओर उसको मौत भी न आयेगी वह उस अकेले मालिक का किसी को साझी बनाना है, अपने शीश और मस्तिष्क को उसके अतिरिक्त किसी दूसरे के आगे झुकाना, अपने हाथ किसी और के आगे जोड़ना, उसके अलावा किसी और को पूजा के योग्य मानना, मारने वाला जिन्दा करने वाला, रोजी देने वाला और लाभ हानि का मालिक समझना घोर पाप और अत्यन्त अत्याचार है चाहे वह किसी देवी देवता को माना जाये या सूरज चाँद नक्षत्र अथवा किसी पीर फ़कीर को। किसी को भी उस मालिक के अलावा पूजा योग्य समझना शिर्क है जिसको वह मालिक कभी माफ़ नहीं करेगा, इसके अलावा हर पाप को वह अगर चाहे तो माफ़ (क्षमा) कर देगा। इस पाप को स्वंय हमारी बुद्धि भी इतनी ही बुरा समझती है और हम भी इस कर्म को इतना ही नापसंद करते हैं। &lt;br /&gt;एक उदाहारण &lt;br /&gt;उदाहारणार्थ यदि आपकी पत्नी बड़ी झगड़ालू और बात-बात पर गालियों देने वाली हो। और कुछ कहना सुनना नहीं मानती हो लेकिन आप उस से घर से निकलने को कह दें तो वह कहती है कि मैं केवल तेरी हूँ तेरी रहूँगी, और तेरे दरवाजे पर मरूंगी, और एक पल क लि‍ए तेरे घर से बाहर नहीं जाऊँगी तो आप लाख क्रोध और गुस्से के बाद भी उससे निर्वाह करने पर विवश हो जाएंगे। &lt;br /&gt;इसके विपरीत यदि आपकी पत्नी अत्यन्त सेवा करने वाली और आज्ञाकारी है, वह हर समय आपका ध्यान रखती है, आपके लि भोजन गर्म करती है ओर परोसती है प्यार और प्रेम की बातें करती है, वह एक दिन आप से कहने लगे आप मेरे पति देव है। मेरा अकेले आप से काम नहीं चलता, इसलिए अपने पड़ोसी जो हैं मैंने आज से उन्हें भी अपना पति बना लिया है तो यदि आप में कुछ भी लज्जा और मानवता है और आप के खून मे गर्मी है तो आप यह बदार्शत नहीं कर पायेंगे, या अपनी पत्नी की जान ले लेंगे अथवा स्वंय मर जायेंगे। &lt;br /&gt;आखिर ऐसा क्यों है? केवल इसलि‍ए कि आप अपनी पत्नी के लिए किसी को साझी देखना नहीं चाहते। आप नुत्फे (वीर्य) की एक बूंद से बने हैं तो अपना साझी नहीं करते, तो वह मालिक जो उस अपवित्र बूंद से मनुष्य को पैदा करता है, वह कैसे यह बदार्शत कर लेगा कि कोई उसका साझी हो। उसके साथ किसी और की भी पूजा की जाये। जब कि इस पूरे संसार में जिसको जो कुछ दिया है उसी ने दिया है। जिस प्रकार एक वेश्या अपनी मान मर्यादा बेचकर हर आने वाले व्यक्ति को अपने ऊपर अधिकार दे देती है तो इसके कारण वह हमारी आँखों से गिरी हुई रहती है। वह मनुष्य अपने मालिक की आँखो में उस से अधिक नीच और गिर हुआ है जो उसको छोड़कर किसी और की पूजा में विलीन हो। वह कोई देवता या मूर्ति हो अथवा कोई दूसरी वस्तु। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पवित्र कुरआन मे मूर्ति &lt;br /&gt;पूजा का विरोध &lt;br /&gt;मूर्ति पूजा के लए कुरआन में एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है जो (गौर) विचार करने योग्य है। &lt;br /&gt;‘‘अल्लाह को छोड़कर तुम जिन वस्तुओं को पूजते हो वह सब मिलकर एक मक्खी भी पैदा नहीं कर सकतीं, और पैदा करना तो दूर की बात है यदि मक्खी उनके सामने से कोई चीज प्रसाद इत्यादि छीन ले तो वापस नहीं ले सकतीं। फिर कैसे कायर है पूज्य और कैसे कमजोर हैं पूजने वाले, और उन्होंने उस अल्लाह की कद्र नहीं कि जैसी करनी चाहिये थी जो ताक़तवर और जबरदस्त है।‘‘ &lt;br /&gt;क्या अच्छी मिसाल है, बनाने वाला तो स्वंय ईश्वर होता है अपने हाथों से बनायी गयी मूर्तियों के हम बनाने वाले यदि इन मूर्तियों में थोड़ी बहुत समझ होती तो वह हमारी पूजा करतीं। &lt;br /&gt;एक बोदा विचार &lt;br /&gt;कुछ लोगों का मानना यह हैं कि हम उनकी पूजा इस लिए करते हैं कि उन्होंने ही हमें मालिक का मार्ग दिखाया और उनके वास्ते से हम मालिक की दया प्राप्त करते हैं। यह बिल्कुल ऐसी बात हुई कि कोई कुली से ट्रेन के बारे में मालूम करें जब कुली उसे ट्रेन के बारे में जानकारी दे दे तो वह ट्रेन की जगह कुली पर ही सवार हो जाये, कि इसने ही हमें ट्रेन के बारे में बताया है। इसी तरह अल्लाह की सही दिशा और मार्ग बताने वाले की पूजा करना बिल्कुल ऐसा है जैसे ट्रेन को छोड़कर कुली पर सवार हो जाना। &lt;br /&gt;कुछ भाई यह भी कहते हैं कि हम केवल ध्यान जमाने के लिए इन मूर्तियों को रखते हैं। यह भी खूब रही कि खूब गौर से कत्ते को देख रहे हैं और कह रहे हैं कि पिताजी का ध्यान जमाने के लिए कुत्ते को देख रहे हैं। कहाँ पिताजी कहाँ कुत्ता? कहाँ यह कमजो़र मूर्ति और कहा वह अत्यन्त बलवान, दयावान मालिक, इस से ध्यान बंधेगा या हटेगा। &lt;br /&gt;निष्कर्ष यह है कि किसी भी प्रकार से किसी को भी उसका साझी मानना सबसे बड़ा पाप है जिसको ईश्वर कभी माफ़ नहीं करेगा, और ऐसा आदमी सदा के लिए नरक का ईधन बनेगा। &lt;br /&gt;सर्वश्रेष्ठ नेकी ईमान है &lt;br /&gt; इसी तरह सब से बड़ी भलाई, पुण्य और नेकी ‘‘ईमान‘‘ है जिसके बारे में संसार के तमाम धर्म वाले कहते हैं कि सब कुछ यहीं छोड़ जाना है। मरने के बाद आदमी के साथ केवल ईमान जायेगा। ईमानदारी या ईमान वाला उसको कहते हैं जो हक़ वाले को हक़ देने वाला हो। और हक़ मारने वाले को ज़ालिम कहते है। इस मनुष्य पर सब से बड़ा अधिकार उसके पैदा करने वाले का है। वह यह कि सब को पैदा करने वाला ज़िन्दगी देने वाला मालिक, रब, और पूजा के योग्य वह अकेला है तो फिर उसी की पूजा की जाये, उसी को मालिक लाभ-हानि इज्ज़त-जिल्लत देने वाला समझा जाये और यह दिया हुआ जीवन उसी की मर्जी और आज्ञा के पालन के साथ व्यतीत किया जाए, अर्थात उसी को माना जायें और उसी की मानी जायें इसी का नाम ईमान है। उस मालिक को अकेला माने बिना और उसके आज्ञा पालन के बिना इन्सान ईमानदार नहीं हो सकता। अपितु वह बेईमान कहलाएगा। &lt;br /&gt; मालिक का सबसे बड़ा हक़ (अधिकार) मारकर लोगों के सामने ईमानदारी दिखाना ऐसा ही है कि एक डाकू बहुत बड़ी डकैती से धनवान बन जायें और फिर दुकान पर लालाजी से कहे कि आपका एक पैसा हिसाब में ज्यादा चला गया है आप ले लीजिए इतना माल लूटने के बाद दो पैसे का हिसाब देना जैसी ईमानदारी है अपने मालिक को छोड़कर किसी और की पूजा अर्चना करना उस से भी बुरी ईमानदारी है। &lt;br /&gt; ईमानदारी केवल यह है कि इन्सान अपने मालिक को अकेला माने उस अकेले की पूजा करे और उसके द्वारा दिये गये जीवन की हर घड़ी को मालिक की मर्जी और उसकी आज्ञा पालन के साथ व्यतीत करे। उसके दिये हुए जीवन को उसकी आज्ञा के अनुसार बिताना ही धर्म कहलाता है और उसकी आज्ञा का उल्लंधन करना अधर्म। &lt;br /&gt;सच्चा धर्म &lt;br /&gt;सच्चा धर्म शुरू से ही एक है और सब की शिक्षा है कि उस अकेले को माना जाये, और उसकी आज्ञा का पालन किया जाये पवित्र कुरआन ने कहा है ‘‘धर्म तो अल्लाह का केवल इस्लाम है और इस्लाम के अतिरिक्त जो भी धर्म लाया जायेगा वह मान्य नहीं है‘‘ (सुरः आले इमरान: 85) &lt;br /&gt; इन्सान की कमजोरी है कि उसकी आँख एक विशेष सीमा तक देख सकती है, उसके कान एक सीमा तक सूंघने, चखने और छूने की शक्ति भी सीमित है, इन पाँच इन्द्रियों से उसकी बुद्धि को मालूमात मिलती है। इसी प्रकार बुद्धि के कार्य की भी एक सीमा है। &lt;br /&gt; वह मालिक किस तरह का जीवन पसन्द करता है, उसकी पूजा किस प्रकार की जाये, मरने के बाद क्या होगा? स्वर्ग और नरक में ले जाने वाले कर्म क्या हैं? यह सब मनुष्य की बुद्धि और स्वंय इन्सान पता नहीं लगा सकता। &lt;br /&gt;ईशदूत &lt;br /&gt;इन्सान की इस कमज़ोरी पर दया करके उसके मालिक ने उन महान पुरूषों पर जिनको उसने इस पदवी के योग्य समझा अपने, दूतों (फरिश्तों) के द्वारा अपने आदेश भेजे जिन्होंने मनुष्य को जीवन व्यतीत करने और अपनी उपासना के ढंग बताये और जीवन की वह हकीकतें बतायीं जो वह अपनी बुद्धि के आधार पर नहीं समझ सकता था। ऐसे महान पुरूषों के नबी, रसूल या पैग़म्बर (संदेष्टा) कहा जाता है। उसे अवतार भी कह सकते है यदि अवतार का मतलब यह हो जिस पर उतारा जाये। आजकल अवतार का मतलब यह समझा जाता है कि वह स्वंय ईश्वर है अथवा ईश्वर उसके रूप में उतरा। यह अन्धविश्वास है। यह बहुत बड़ा पाप है। इस अन्धविश्वास ने एक मालिक की पूजा से हटा कर मनुष्य को मूर्ति पूजा की दलदल मे फँसा दिया। &lt;br /&gt;यह महापुरूष जिन को अल्लाह ने लोगों को सच्चा मार्ग बताने के लिए चुना, और जिन को नबी, रसूल कहा गया। हर बस्ती और क्षेत्र और हर ज़माने में आते रहे हैं। उन सब ने एक ईश्वर को मानने, केवल उसी अकेले की पूजा करने और उसकी मर्ज़ी से जीवन व्यतीत करने का जो ढंग (शरीअत या धार्मिक कानून) वह लायें हैं उनका पालन करने को कहा। उनमें से एक रसूल ने भी एक ईश्वर के अलावा किसी को भी पूजा के लिए नहीं बुलाया अपितु उन्होंने सब से ज्यादा इसी पाप से रोका उनकी बातों पर लोगों ने यक़ीन किया और सच्चे रास्तों पर चलने लगे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मूर्ति पूजा का आरम्भ &lt;br /&gt;ऐसे तमाम संदेष्टा (पैग़म्बर) और उनके अनुयायी मनुष्य थे, उनको मौत आनी थी (जिसको मृत्यू नहीं वह केवल खुदा है) नबी या रसूल के मरने के पश्चात उनके अनुयायियों को उनकी याद आयी और वे उन के दुःख में बहुत रोते थे। शैतान को अवसर मिल गया वह मनुष्य का दुश्मन है। और मनुष्य की परीक्षा के लिए उस मालिक ने उसको बहकाने और बुरी बातें उसके दिल में डालने की शक्ति ही है। कि देंखे कौन उस पैदा करने वाले मालिक को मानता है और कौन शैतान को मानता है। &lt;br /&gt;शैतान लोगों के पास आया और कहा कि तुम्हें अपने महागुरू (रसूल या नबी) से बड़ा प्रेम है। मरने के बाद वे तुम्हारी निगाहों से ओझल हो गये है। अतः मैं उनकी एक मूर्ति बना देता हूँ उसको देखकर तुम सन्तुष्टि पा सकते हो। शैतान ने मूर्ति बनाई। जब उसका जी करता वह उसे देखा करते थे। धीरे-धीरे जब इस मूर्ति का प्रेम उन के मन मे बस गया शैतान ने कहा कि यदि तुम इस मूर्ति के आगे अपना सिर झुकाओगे तो इस मूर्ति में भगवान को पाओगे। मनुष्य के दिल में मूर्ति की बड़ाई पहले ही भर चुकी थी। इसलिए उसने मूर्ति के आगे सिर झुकाना और उसे पूजना आरम्भ कर दिया और यह मनुष्य जिसके जिसके पूजने योग्य केवल एक ईश्वर तथा मूर्तियों को पूजने लगा और शिर्क में फँस गया। &lt;br /&gt;इस समस्त संसार का सरदार (मनुष्य) जब पत्थर या मिट्टी के आगे झुकाने लगा तो वह ज़लील हुआ और मालिक की निगाह से गिर कर सदा के लिए नरक का ईधन बन गया। उसके बाद अल्लाह ने फिर अपने रसूल भेजे जिन्होने लोगों को मूर्ति पूजा और अल्लाह के अलावा दूसरे की पूजा से रोका, कुछ लोग उनकी बात मानते रहे तथा कुछ लोगों ने उनकी अवमानना कीं। जो लोग मानते थे अल्लाह उनसे प्रसन्न होते, और जो लोग उनके उपदेशो की अवहेलना करते उनके लिए आसमान से विनाश के फैसले कर दिये जाते है। &lt;br /&gt;रसूलों की शिक्षा &lt;br /&gt;एक के बाद एक नबी और रसूल आते रहे, उनके धर्म का आधार एक होता वह एक धर्म की ओर बुलाते कि एक ईश्वर को मानो, किसी को उसके व्यक्तित्व और गुणों मे ंसाझी न बनाओं, उसकी पूजा में किसी को साझी न करो, उसके सब रसूलों को सच्चा जानों, उसके फरिश्तों को जो उसकी पवित्रा मख़लूक हैं न खाते पीते है न सोते हैं, हर काम में मालिक की आज्ञा पालन करते हैं, सच्चा जानों, उसने अपने फरिश्तों के माध्यम से वाणी भेजी या ग्रन्थ उतारे है उन सब को सच्चा जानों, मरने के बाद दोबारा जीवन पाकर अपने अच्छे बुरे कार्यो का बदला पाना है इस पर यकी़न करो, और यह भी जानो कि जो भाग्य अच्छा या बुरा है वह मालिक की ओर से है और मैं इस समय जो शरीयत और जीवन बिताने के ढंग लेकर आया हूँ उनका पालन करो। &lt;br /&gt;जितने अल्लाह के नबी और रसूल आये सब सच्चे थे और उन पर जो धार्मिक ग्रन्थ उतरे वह सब सच्चे थे उन सब पर हमारा ईमान (श्रद्धा) है और हम उनमें अन्तर नही करते। सच्चाई का तराजू यह है कि जिन्होंने एक ईश्वर को मानने की ओर आमन्त्रित किया हो और उनकी पूजा की बात न हो। अतः जिन महापुरूषों के यहाँ मूर्तिपूजा या अनेकेश्वरवाद की शिक्षा हो वे या तो रसूल नहीं हैं अथवा उनकी शिक्षाओं मे फेरबदल हो गया है। मुहम्मद साहब के पूर्व के तमाम रसूलों की शिक्षाओं में फेरबदल कर दिया गया है और कही-कही ग्रन्थों को भी बदल दिया गया। &lt;br /&gt;अन्तिम संदेश हज़रत मुहम्मद &lt;br /&gt;यह एक बहुमूल्य सत्य है कि हर आने वाले रसूल और नबी के द्वारा और उनके ग्रन्थों में एक अन्तिम नबी की भविष्यवाणी की गयी है। और यह कहा गया है कि उनके आने के पश्चात और उनको पहचान लेने के बाद सारी प्राचीन शरीअतें और धार्मिक कानून छोड़ कर उपनकी बात मानी जाये और उनके द्वारा लाये गये ग्रन्थ और धर्म पर चला जाये। यह भी इस्लाम की सत्यता का प्रमाण है कि प्राचीन ग्रन्थों में अत्यन्त फेरबदल के बावजूद उस मालिक ने अन्तिम रसूल के आने की ख़बर को बदलने न दिया ताकि कोई यह कह सके कि हमें खबर न थी। वेदों में उसका नाम नराशंस, पुराणों में कल्कि अवतार, बाइबिल में फारकलीट और अहमद और बौद्ध में अन्तिम बुद्ध इत्यादि लिखा गया है। &lt;br /&gt;इन धार्मिक ग्रन्थों में मुहम्मद साहब का जन्म स्थान, जन्म तिथि, समय और बहुत से वास्तविक लक्ष्ण पहले ही बता दिये गये थे। &lt;br /&gt;हजरत मुहम्मद का जीवन परिचय &lt;br /&gt;अब से लगभग साढ़े चैदह सौ वर्ष पूर्व वह अन्तिम ऋषि मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सऊदी अरब के देश मक्का में पैदा हुऐ। पैदा होने के कुछ माह पूर्व ही उनके पिता का देहान्त हो गया था। माँ भी कुछ ज्यादा दिन जीवित नहीं रही। पहले दादा और उनके देहान्त के बाद आपके चाचा ने उन्हें पाला। संसार में सबसे निराला यह इन्सान समस्त मक्का नगर की आँखों का तारा बन गया। ज्यों-ज्यों आप बड़े होते गये, आपके साथ लोगों का प्रेम बढ़ता गया, आपको सच्चा और ईमानदार कहा जाने लगा, लोग अपनी बहुमूल्य धरोहर (अमानत) आपके पास रखते। अपने परस्पर झगड़ों का निपटारा कराते। काबा, जो मक्का में अल्लाह का पवित्र घर है उसको दुबारा बनाया जा रहा था। उसकी एक दीवार के कोन में एक पवित्र पत्थर है जब उसको उसके स्थाान पर स्थापित करने की बारी आयी तो उसकी पवित्रता के कारण मक्का के तमाम वंशज और सरदारों की चाहत थी कि पवित्रा पत्थर स्थापित करने का अधिकार उसे ही मिले, इसके लिए तलवारें निकल आयीं, तभी एक समझदार आदमी ने निर्णय किया कि जो सबसे पहला आदमी यहॉ आयेगा वही इसका फेसला करेगा। सब लोग तैयार हो गये, उस दिन सबसे पहले आने वाले हज़रत मुहम्मद सल्ल. थे, सब एक स्वर होकर बोले वाह वाह, हमारे बीच सच्चा और ईमानदार आदमी आ गया है हम सब राज़ी है। &lt;br /&gt;आपने एक चादर बिछाई और उसमें वह पत्थर रखकर कहा हर वंश के सरदार चादर का एक किनारा पकड़कर उठाए, जब पत्थर दीवार तक पहुँच गया तो आप ने अपने हाथों से उसके स्थान पर रख दिया और यह बड़ी लड़ाई समाप्त करवा दी। &lt;br /&gt;इसी प्रकार लोग आपको हर कार्य में आगे रखते थे, आप यात्रा पर जाने लगते तो लोग व्याकुल हो जाते, और जब आप लौटते ता आप से मिलकर फूट-फूटकर रोने लगते। &lt;br /&gt;उन दिनों वहॉ अल्लाह के घर काबा में 360 (बुत) देवी देवताओं की मूर्तियॉ रखी हुई थी। पूरे अरब देश में ऊँच नीच, छुआ, छूत, नारी पर अत्याचार, शराब, जुआ, सूद, ब्याज, लड़ाई बलात्कार जैसी जाने कितनी बुराईयाँ फैली हुई थीं। &lt;br /&gt;जब आप 40 वर्ष के हुए तो अल्लाह ने अपने फरिश्ते (ईशदूत) के माध्यम से आप पर कुरआन उतारना आरम्भ किया और आपको रसूल बनाने का शुभ संदेश और लोगों को एकेश्वरवाद की तरफ बुलाने का दायित्व सौंपा। &lt;br /&gt;सत्य की आवाज़ &lt;br /&gt;आपने एक पहाड़ की चोटी पर चढ़कर एक आवाज़ लगायी। लोग इस आवाज़ पर टूट पड़े इसलिए कि यह एक सच्चे ईमानदार आदमी की आवा़ज थी। आपने प्रश्न किया, यदि मैं तुम से कहूँ कि इस पहाड़ के पीछे से एक विशाल सेना आ रही है और तुम पर हमला करने वाली है, तो क्या विश्वास करोगे? &lt;br /&gt;सब ने एक स्वर होकर कहा, भला आप की बात पर कौन विश्वास नहीं करेगा आप कभी झूठ नहीं बोलते और पहाड़ की चोटी से दूसरी ओर देख भी रहे हैं। इसके बाद आपने लोगों को इस्लाम की तरफ बुलाया, मूर्तिपूजा से रोका और मरने के बाद नरक की आग से डराया। &lt;br /&gt;मनुष्य की एक कमज़ोरी &lt;br /&gt;मनुष्य की यह कमजोरी रही है कि वह अपने पूर्वजों की गलत बातों को भी अन्धविश्वास में मान कर चला जाता है। इन्सानों की बुद्धि और तर्को के नकराने के बावजूद मनूष्य पूर्वजों की बातो पर जमा रहता है और उसके अतिरिक्त करना तो क्या, कुछ सुन भी नहीं सकता। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रूकावटें और परीक्षाये &lt;br /&gt; यही कारण था कि चालीस वर्ष की आयु तक आपका आदर करने, और सच्चा मानने और जानने पर भी मक्का के लोग आपकी शिक्षाओं के शत्रु हो गये। आप जितना ज्यादा लोगो को इस सच्चाई की ओर बुलाते, लोग और ज्.यादा दुश्मनी करते। जब कुछ लोग ईमान वालों को सताते, मारते और आग पर लिटा लेते, गले में फन्दा डाल कर घसीटते, और उन पर पत्थर बरसाते। परन्तु आप सब के लिए अल्लाह से प्रार्थना करते, किसी से बदला नहीं लेते, पूरी-पूरी रात अपने मालिए से उनके लिए हिदायत की दुआ करते एक बार मक्का के लोगों से मायूस होकर ताइफ नगर की ओर गये। वहॉ के लोगों ने उस महापुरूष का अनादर किया आपके पीछे लड़के लगा दिये जो आपको भला बुरा कहते। उन्होंने आप को पत्थर मारे जिससे आपके पैरों से रक्त बहने लगा, तक्लीफ़ की वजह से आप कही बैठ जाते वे लड़के आपको पुनः खड़ा कर देते, और फिर मारते, इस हाल में आप नगर से बाहर निकल कर एक स्थान पर बैठ गये, आप ने उन्हें श्राप नहीं दिया बल्न्कि अपने मालिक से दुआ की, ‘‘ मालिक, इनको समझा दे दे यह जानते नहीं।‘‘ आपको इस पवित्र संदेश और ईशवाणी पहुॅचाने के कारण अपना प्रिय नगर मक्का छोड़ना पड़ा, फिर आप अपने नगर से मदीना नगर में चले गये, वहॉ भी मक्का वाले विरोधी, फौजें बनाकर बार-बार आपसे लड़ने गये। &lt;br /&gt;सत्य की जीत &lt;br /&gt;सत्य की सदा जीत होती है सो यहॉ भी हुई, 23 साल के कठिन परिश्रम के बाद आप सब पर विजयी हुए और सत्य मार्ग की और आपके &lt;br /&gt;निःस्वार्थ निमन्त्रण ने पूरे अरब देश को इस्लाम की शीतल छाया में खड़ा कर दिया, और पूरी दुनियॉ में एक क्रान्ति आ गयी, मूर्तिपूजा बन्द हुई, ऊँच नीच ख़त्म हुयी, और सब लोग एक अल्लाह को मानने और पूजा करने वाले हो गये। &lt;br /&gt;अन्तिम वसीयत &lt;br /&gt;अपनी मृत्यू से कुछ ही वर्ष पूर्व आपने लगभग सवा लाख लोगों के साथ हज किया और समस्त लोगों को अपनी अन्तिम वसीयत की, जिसमें आप ने कहा, लोगों तुमसे मरने के बाद जब कर्मो की पूछ होगी तो मेरे विषय में भी पूछा जायेगा, कि क्या मैंने अल्लाह का दीन (धर्म) और वह सच्चाई लोगों तक पहुँचाई हैं? सब ने कहा निःसंदेह आप पहुँचा चुके। आप ने आसमान की ओर उंगली उठायी ओर तीन बार कहा, ऐ अल्लाह आप गवाह रहिये, आप गवाह रहिये, आप गवाह रहिये। इसके बाद आपने लोगों से फरमाया, यह सच्चा दीन जिन तक पहुँच चुका है वह उनके पास पहुँचाए जिनके पास नहीं पहुँचा है। &lt;br /&gt;आप ने यह भी ख़बर दी की मैं रसूल हूँ अब मेरे बाद कोई रसूल न आयेगा, मैं ही वह अन्तिम ऋषि नराशस और कल्कि अवतार हूँ जिसकी तुम प्रतीक्षा करते रहे थे और जिसके बारे में तुम सब कुछ जानते हो। &lt;br /&gt; कुरआन में है जिन ‘‘लोगों को हम ने किताब दी है वे इस (पैग़बर मुहम्मद)‘‘ को पहचानते हैं जैसे अपने बेटों को पहचानते हैं। हाँ निःसंदेह उनमें एक गिरोह हक़ को छिपाता है। (सूर: अल बक़रा 147) &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हर मनुष्य का कर्तव्य &lt;br /&gt;अब प्रलय तक आने वाले हर मनुष्य का कर्तव्य है और उसका धार्मिक और इन्सानी दायित्व है कि वह उस अकेले मालिक की पूजा करे, &lt;br /&gt;उसके साथ किसी को साझी न जाने और न माने, और उसके अन्तिम संदेष्टा हज़रत मुहम्मद सल्ल0 को सच्चा जाने, ओर उनके द्वारा लाए गये दीन ओर जीवन व्यतीत करने के ढंग का पालन करे, इस्लाम में इसी को इरमान कहा गया है इसके बिना मरने के बाद हमेशा के लिए नरक में जलना पड़ेगाः &lt;br /&gt;दो प्रश्न &lt;br /&gt;यहॉ आपके मस्तिष्क में दो सवाल पैदा हो सकते हैं, मरने के बाद स्वर्ग या नरक में जाना दिखाई तो देता नहीं, उसे क्यों मानें? इस सम्बन्ध में यह जान लेना उचित होगा कि तमाम प्राचीन ग्रन्थों में स्वर्ग, नरक का वर्णन किया गया हैं जिससे यह ज्ञात होता है कि स्वर्ग नरक का विचार तमाम धर्मों द्वारा प्रामणित है। इसे हम एक उदाहरण में भी समझ सकते हैं। बच्चा जब माँ के पेट में होता है, अगर उस से कहा जाये कि जब तुम गर्भ से बाहर निकलोगे जो दूध पि़योगे, रोओगे, गर्भ के बाहर तुम बहुत सारी चीज़े देखोगे, तो गर्भ के अन्दर होने की अवस्था मे उसे विश्वास नहीं होगा। जैसे ही गर्भ के बाहर निकलेगा तब सब चीजों को अपने सामने पायेगा। इसी प्रकार यह समस्त संसार एक गर्भ अवस्था हैं यहॉ से मौत के बाद निकलकर जब मनुष्य आखिरत के संसार मे आँखे खोलेगा तो सब कुछ अपने सामने पायेगा। &lt;br /&gt;वहाँ के स्वर्ग नरक और दूसरी वास्तविकताओं की ख़बर हमें उस सच्चे ने दी है जिसको उसके जानी दुश्मन भी कभी झूठा न कह सके। और कुरआन जैसी पुस्तक ने दी जिसकी सच्चाई हर अपने पराये ने मानी हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दूसरा सवाल &lt;br /&gt;दूसरी चीज़ जो आपे मन में खटक सकती है कि जिन सारे रसूल धर्म और धार्मिक ग्रन्थ सच्चे थे तो फिर इस्लाम कुबूल करना क्या ज़रूरी हैं? &lt;br /&gt; आज की वर्तमान दुनिया मे इसका जवाब बिल्कुल आसान है, हमारे देश की एक संसद (पार्लियामेंट) है यहॉ का एक संविधान है। यहॉ जितने प्रधानमंत्री आये वे सब भारत के वास्तविक प्रधानमंत्री थे, पंडित जवाहरलाल नेहरू, शास्त्री जी, फिर इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी फिर वी0पी0 सिंह इत्यादि, देश की ज़रूरत और समय के अनुकूल जो कानून और अध्यादेश उन्होंने पास किये वे सब भारत के थे मगर अब जो वर्तमान प्रधानमंत्री है। उनकी संसद और सरकार जो भी कानून में संशोधन करेगी उससे पुराना कानून समाप्त हो जायेगा, और भारत के हर नागरिक के लिए अनिवार्य होगा कि उस नया संशोधित कानून का पालन करें। यदि अब कोई भारतीय नागरिक यह कहे कि जब इंदिरा गाँधी असली प्रधानमंत्री थी तो मैं उनके ही कानून मानूंगा, इस नये प्रधानमंत्री के कानून में नहीं मानता और न उनके द्वारा लगाये गये टैक्स दूंगा तो ऐसे आदमी को हर कोई भारत विरोधी कहेगा और उसे सजा का पात्र समझा जायेगां इसी तरह सारे धर्म, और धार्मिक ग्रन्थ अपने अपने समय में आये ओर सब सत्य की शिक्षा देते थे। इसलिए अब तमाम रसूलों और धार्मिक ग्रन्थों को सच्चा मानते हुए भी अंतिम रसूल मुहम्मद स0 पर ईमान लनाना हर मनुष्य के लिए अनिवार्य है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सत्य धर्म केवल एक है &lt;br /&gt; इसलिए यह कहना किसी तरह उचित नहीं कि सारे धर्म ईश्वर की आरे जाते हैं। रास्ते अलग-अलग हें, मंजिल एक है। सत्य केवल एक होता है। असत्य बहुत हो सकते है। नूर एक होता है, अन्धेरे बहुत हो सकते हैं। सच्चा धर्म केवल एक है, वह शुरू ही से एक है। अतः उस एक को मानना ओर उसी एक की मानना इस्लाम है। धर्म कभी नहीं बदलता केवल शरीअत (कानून) समय के अनुसार बदलते रहते हैं ओर वे भी उसी मालिक के बताए हुए ढंग पर। &lt;br /&gt; जब मानव जाति एक है और उनका मालिक एक है तो रास्ता भी केवल एक है, कुरआन ने कहा है ‘‘धर्म तो अल्लाह केवल इस्लाम है‘‘ &lt;br /&gt;एक और प्रश्न &lt;br /&gt;यह एक प्रश्न भी मन में आ सकता है कि हज़रत मुहम्मद स0 अल्लाह के सच्चे नबी ईशदूत हैं और वह संसार के अन्तिम दूत भी है इसका सुबूत है? &lt;br /&gt; उत्तर साफ़ है कि सर्वप्रथम यह कुराअन ईश्वर का कलाम है। उसने संसार को अपने सच्चे होने के लिए जो तर्क दिये हैं वह सब को मानने पड़े हैं। और आज तक उन का विरोध नही हो सका है। उसने हज़रत मुहम्मद के सच्चे और अन्तिम नबी (ईशदूत) होने की घोषणा की है। दूसरी बात यह है हज़रत मुहम्मद के जीवन का एक एक पल संसार के सामने है! डनका समस्त जीवन इतिहास की खुली किताब है। संसार में किसी भी मनुष्य का जीवन आपकी जीवनी की तरह सुरक्षित और उजाले में नहीं है। आपके शत्रुओं और इस्लाम दुश्मन इतिहासकारों ने भी कभी यह नहीं कहा कि मुहम्मद साहब ने अपने व्यक्तिगत जीवन में कभी किसी के विषय में झूठ बोला है। आपके नगरवासी आपकी सच्चाई की क़समें खाते थे। जिस श्रेष्ठ व्यक्ति ने अपने निजी जीवन में कभी झूठ नहीं बोला, वह धर्म के नाम पर और ईश्वर के नाम पर झूठ कैसे बोल सकता था। आपने स्वंय यह बताया है कि मैं अन्तिम नबी हूँ मेरे बाद अब कोई नबी नहीं आयेगा न कोई धर्म आयेगा, और मेरे आने के विषय में स नबियों ने भविष्यावाणी की है। सारे धार्मिक ग्रन्थों में अन्तिम ऋषि, कल्कि, अवतार की जो भविष्यवाणी की गयी हैं और लक्ष्ण और पहचानें बताई गयी हैं यह केवल हज़रत मुहम्मद के विषय में साबित होती हैं &lt;br /&gt;पंडित श्री राम शर्मा का विचार &lt;br /&gt;पंडित री राम शर्मा ने लिखा हैं कि जो इस्लाम ग्रहण न करे और हज़रत मुहम्मद और आपके धर्म को न माने वह हिन्दु भी नहीं है। इसलिए कि हिन्दुओं के धार्मिक ग्रन्थों में कल्कि अवतार और नराशंस के इस धरती पर आ जाने के बाद उनको और उनका धर्म मानने को कहा गया है तो जो हिन्दु भी अपने धार्मिक ग्रन्थों में आस्था रखता हो इस माने बना मरने बउद जीवन मं नरक की आग, वहॉ ईश्वर के साक्षात दर्शन से वंचित, और उसके क्रोध का भागीदार होगा। &lt;br /&gt;ईमान की आवश्यकता &lt;br /&gt;मरने के बाद की जिन्दगी के अलावा इस संसार मे भी ईमान और इस्लाम हमारी आवश्यकता है और मानव का कर्तव्य है कि एक मालिक की पूजा करे, जो उसका द्वार छोड़कर दूसरों के सामने झुकता फिरे वह कुत्ता भी अपने मालिक के द्वार पर पड़ा रहता है और उसी से आस लगाता है। वह कैसा इंसान जो अपने सच्चे मालिक को भूल कर दर-दर झुकता फिरे। &lt;br /&gt;परन्तु इस ईमान की ज़्यादा आवश्यकता मरने के बाद के लिए है जहॉ से इंसान वापिस न लौटेगा और मौत पुकारने पर भी उसको मौत मिलेगी। उस समय पछतावा और पश्चाताप भी कुछ काम न देगा। यदि मनुष्य यहॉ से ईमान के बिना चला गया तो हमेशा नरक की आग मे जलना पड़ेगा। यदि इस संसार में आग की एक चिंगारी भी हमारे शरीर को छू जाये जो हम तड़प जाते हैं। तो नरक की आग कैसे सहन हो सकेगी जो इस आग से सत्तर गुना तेज़ है और उसमे हमेशा जलना है जब एक खाल जल जाएगी जो दूसरी खालबदल दी जाएगी और निरन्तर यह सजा भुगतनी होगी। &lt;br /&gt;प्रिय पाठक &lt;br /&gt;मेरे प्रिय पाठक। मौत का समय न जाने कब आ जाये जो सांस अन्दर है उसके बाहर अपने का भी भरोसे नहीं। मौत से पहले समय है अपनी सब से पहली और सब से बड़ी जिम्मेदारी का ध्यानकर लें। ईमान के बिना न यह जीवन, जीवन है और न मरने के बाद अपने वाला जीवन। &lt;br /&gt;कल सब को अपने मालिक के पास जाना है यहॉ सब से पहले ईमान की पूछ होगी। मुझे भी स्वार्थ है इस बात का कि कल हिसाब के दिन आप यह न कह दें कि हम तक बात पहुँचाई ही नहीं थी। मुझे आशा है कि यह सच्ची बातें आप के दिल में घर कर गयी होगी तो आइये भग्यवान, सच्चे दिल और सच्ची आत्मा वाले मेरे प्रिय पाठक, उस मालिक को गवाह बनाकर और ऐसे सच्चे दिल से जिसे दिलों के भेद जानते वाला मान ले इक़रार करें और प्रण लेः- &lt;br /&gt;‘‘अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलूह, सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम‘‘ &lt;br /&gt;अर्थ मैं गवाही देता हू इस बात की कि अल्लाह के सिवा कोई पूजा के योग्य नही, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं, और हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, अल्लाह के सच्चे बन्दे और रसूल है।‘‘ &lt;br /&gt;मैं तौबा करता हूँ कुफ्र (नास्तिकता) से शिर्फ (किसी प्रकार भी अल्लाह का साझी बनाने) से और समस्त प्रकार के पापों से। और इस बात का प्रण लेता हूँ कि अपने पैदा करने वाले सच्चे मालिक के सब आदेश मानूंगा और उसके सच्चे नबी हज़रत मुहम्मद स0 की सच्ची पैरवी (अनुसरण) करूंगा। &lt;br /&gt;करूणामय और दयावान मालिक मुझे और आपको इस राह पर मरते दम तक कायम रखे। &lt;br /&gt;मेरे प्रिय पाठको। अगर आप अपनी मौत तक इस यकी़न और ईमान के अनुरूप अपना जीवन गुजारते रहे तो फिर मालूम होगा कि आप के इस भाई ने कैसा प्रेम का हक़ अदा किया। &lt;br /&gt;ईमान की परीक्षा &lt;br /&gt;इस इस्लाम और ईमान की वजह से आपकी परीक्षा भी हो सकती है। मगर जीत हमेशा सच की होती है। यहाँ भी सत्य की जीत होगी। और अगर जीवनभर परीक्षा से गुज़रना पड़े तो यह सोच कर सह जाना कि इस दुनिया का जीवन तो कुछ दिनों तक सीमित है। मरने के बाद का अपार जीवन, वहॉ का स्वर्ग और उसके सुख प्राप्त के लिए, और मालिक को राजी़ (प्रसन्न करने) के लिए, और उसके साक्षात दर्शन के लिए यह परीक्षायें कुछ भी नहीं हैं। &lt;br /&gt;आपका कर्तव्य &lt;br /&gt;&lt;br /&gt; एक बात और, ईमान और इस्लाम की यह सच्चाई हर उस भाई का हक़ और अमानत है जिस तक नहीं पहुँचा है। अतः आपका भी कर्तव्य है कि निःस्वार्थ होकर केवल अपने को भी हमदर्दी में और उसे मालिक के क्रोध, नरक की आग और सजा़ से बचाने के लिए, दुख दर्द के एहसास के साथ जिस प्रकार प्यारे नबी ने यह सच्चाई पहुँचाई थी। आप भी पहुँचायें, उनको सही सच्चाई पहुचाई थी। आप भी पहुँचायें, उनको सही सच्चा रास्ता समझ में आने के लिए अपने मालिक से दुआ करें। ऐसा व्यक्ति क्या इंसान कहलाने का हकदरार है जिसके सामने एक अन्धा दिखाई न देने की वजह से आग के अलाव में गिर जाये और वह एक बार भी फूटे मुँह से यह न कहे कि तुम्हारा यह मार्ग आग के अलाव की ओर जाता है। इन्सानियत की बात यह है कि उसको रोके उसको पकड़ कर बचाये और प्रण ले कि अपने होते हुए मैं हरगिज तुम्हें आग में गिरने नहीं दूंगा। &lt;br /&gt;ईमान लाने बाद हर मुसलमान पर है कि जिसको दीन की नबी की, कुरान की हिदायत मिल चुकी है वह शिर्क और कुफ्र की आग में फँसे लोगो को बचाने को बचाने की धुन में लग जाये उनकी ठोडी में हाथ दे उनके पांव पकडे कि लोग ईमान से हटकर ग़लत रास्ते पर न जायें। निःस्वार्थ और सच्ची हमदर्दी में कही गयी बात दिल पर असर करती हे अगर आप की वजह से एक आदमी को भी ईमान मिल गया तो हमारा बेड़ा पार हो जाएगा । इसलिए अल्लाह उस आदमी से ज्यादा प्रसन्न होता है जो किसी को कुफ्र और शिर्क से निकालकर सच्चाई के रास्ते पर लगा दे जिस तरह आपका बेटा अगर आपका बागी़ होकर दुश्मन से जा मिले ओर उसी का कहना मानता रहे। यदि कोई सज्जन उसको समझा बुझाकर आपका आज्ञाकारी बना दें तो अप उस सज्जन से कितने प्रसन्न होंगे। मालिक उस बन्दे से इस से ज्यादा प्रसन्न होता है जो दूसरे तक ईमान पहुँचााने और बाटने का माध्यम बन जायंे। &lt;br /&gt;ईमान लाने के बाद &lt;br /&gt; इस्लाम ग्रहण करने के पश्चात जब आप मालिक के सच्चे बन्दे बन गये तो आब आप पर रोजा़ना पाँच बार नमाज़ अनिवार्य है आप इसे सीखें और पढ़ें। इसी से आत्मा की शान्ति और अल्लाह का प्रेम बढ़ेगा। रमजा़न आयोग तो एक महीने के रोजे़ रखने होंगे। मालदार है तो पूरी उम्र में एक बार हज के लिए जाना पड़ेगा। &lt;br /&gt; ख़बरदार! अब आपका शीश (सिर) अल्लाह के अलावचा किसी के आगे न झुके। आप पर शराब जुआ सूद (व्याज) सुअर का मीट, रिश्वत और हर हराम चीज़ निषेध है और उससे बचना है। और अल्लाह की पवित्र बताई हुई चीजों को पूरे चाव (शौक) से सेवन करना हैं। &lt;br /&gt; अपने मालिक द्वारा दिया गया पवित्र ग्रंथ नियमित रूप से पढ़ना है और पवित्रता और सफा़ई के नियम सीखने हैं और सच्चे दिल से यह प्रार्थना करनी है कि है हमारे मालिक हमको, हमारे दोस्तों को, परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को, और इस भूमण्डल पर बसने वाली पूरी मानवता को ईमान के साथ जिन्दा रख और ईमान के साथ इन्हें मौत दे। इसलिए कि ईमान ही इस मानव समाज का पहला और अन्तिम सहारा हैं जिस प्रकार अल्लाह के एक दूत हज़रत इब्राहीम जलती हुई आग मे अपने ईमान की बदौलत कूद गये थे और का बाल बांका नहीं हुआ था आज भी इस ईमान की शक्ति आग को पुष्प बना सकती है और सत्य मार्ग की हर रूकावट को खत्म कर सकती है। &lt;br /&gt; हो अगर ईमान इब्राहीम का उत्पन्न आज! &lt;br /&gt; पुष्प के स्वभाव से हो आग भी सम्पन्न आज! &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वस्सलाम &lt;br /&gt;प्रस्तुतिः मौलाना मुहम्मद क़लीम सिद्दीक़ी, &lt;br /&gt;प्रकाशकः अरमुग़ान पब्लिकेशन &lt;br /&gt;फुलत, मुज़फ़्फ़र नगर (यू.पी.) &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें, &lt;br /&gt;मो. कलीम सिद्दीकी &lt;br /&gt;फुलत, मुज़फ़्फर नगर &lt;br /&gt;अलीगढ़ में सम्पर्क करें &lt;br /&gt;गली नं0 1 फिरदौस नगर किला रोड, यूनिवर्सीट‍ि फार्म, अलीगढ़- 202002 &lt;br /&gt;http://www.armughan.in/ &lt;br /&gt;------------------ &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दो शब्द &lt;br /&gt;यदि आग की एक छोटी सी चिंगारी आपके सामने पड़ी हो और एक अबोध बच्चा सामने से नंगे पाँव आ रहा हो और उसका नन्हा सा पाँव सीधे आग पर पड़ने जा रहा हो तो आप क्या करेंगे? &lt;br /&gt;आप तुरन्त उस बच्चे को गोद में उठा लेंगे और आग से दूर खड़ा करके आप अपार प्रसन्नता का अनुभव करेंगें। &lt;br /&gt;इसी प्रकार यदि कोई मनुष्य आग में झुलस जाये या जल जाये तो आप तड़प जाते हैं और उसके प्रति आपके दिल में सहानुभूति पैदा हो जाती है। &lt;br /&gt;क्या आपने कभी सोचा अखिर ऐसा क्यों है? इसलिए कि समस्त मानव समाज केवल एक मातृ-पिता की संतान है और हर एक के सीने में एक धड़कता हुआ दिल है जिसमें प्रेम है हमदर्दी है और सहानुभूति है वह एक दूसरे के दुःख सुख मे तड़पता है और एक दूसरे की मदद करके प्रसन्न होता है। इसलिए सच्चा इन्सान और मानव वही है जिसके सीने में पूरी मानवता के लिए प्रेम उबलता हो, जिसका हर कार्य मानवता की सेवा के लिए हो और जो हर एक को दुःख दर्द मे देखकर तड़प जाए और उसकी मदद उसके जीवन का अटूट अंग बन जाए। &lt;br /&gt;इस संसार में मनुष्य का यह जीवन अस्थाई है, और मरने के बाद उसे एक और जीवन मिलेगा जो स्थाई होगा। अपने सच्चे मालिक की उपासना, और केवल उसी की माने बिना मरने के बाद के जीवन में स्वर्ग प्राप्त नहीं हो सकता और सदा के लिए नरक का ईंधन बनना पड़ेगा। &lt;br /&gt; आज लाखों करोड़ो आदमी नरक का ईधन बनने की होड़ में लगे हुए हैं और ऐसे मार्ग पर चल रहे हैं जो सीधे नरक की ओर जाता है। इस वातावरण में उन तमाम लोगों का दायित्व है जो मानव समूह से प्रेम करते हैं और मानवता में आस्था रखते हैं कि वे आगे आयें और नरक में गिर रहें इंसानों को बचाने का अपना कर्तव्य पूरा करें। &lt;br /&gt; हमें खुशी है कि मानव जाति से सच्ची सहानुभूति रखने वाले और उनको नरक की आग से बचा लेने के दुख में घुलने वाले मौलाना मुहम्मद कलीम सिद्दी़क़ी ने प्रेम और स्नेह के कुछ फूल प्रस्तुत किये हैं जिसमें मानवता के प्रति उनका पे्रम साफ़ झलकता है और इसके माध्यम से उन्होंने वह कर्तव्य पूरा किया है जो एक सच्चे मुसलमान होने के नाते हम सब पर है। &lt;br /&gt; इन शब्दों के साथ दिल के ये टुकड़े और आप की अमानता आप के समक्ष प्रस्तुत है। &lt;br /&gt; वसी सुलेमान नदवी, सम्पादक उर्दू मासिक अरमुगान,फुलत, मुज़फ़्फर नगर (यू.पी.)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7189779905817347363-8010589263889888817?l=meratajarba.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://meratajarba.blogspot.com/feeds/8010589263889888817/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7189779905817347363&amp;postID=8010589263889888817&amp;isPopup=true' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7189779905817347363/posts/default/8010589263889888817'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7189779905817347363/posts/default/8010589263889888817'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://meratajarba.blogspot.com/2010/01/aapki-amanat-apki-sewa-men.html' title='पुस्‍तकः आपकी अमानत (आपकी सेवा में) aapki-amanat-apki-sewa-men'/><author><name>Umar Kairanvi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00958476404864434157</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SXlfeinhAII/AAAAAAAAAEA/oKeD8XaDgi4/S220/umarkairanvi1.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7189779905817347363.post-5633591227807469103</id><published>2009-10-02T01:59:00.000-07:00</published><updated>2009-10-02T05:15:19.542-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='hindu'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='support'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नेस्ले'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='muslim'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चिपलूनकर'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='nestle'/><title type='text'>गाँधी जयन्ती पर आओ याद करें उस पोस्ट को जिस में सर्वोधर्म प्रेम देखने को मिला था</title><content type='html'>कल रात मैं ऐसा सपना देखना चाहता था कि महात्‍मा गाँधी जी मेरे सपने मैं आयें तब मैं उनसे पूछूं कि गाँधी जयन्ती पर मैं आपके लिये क्‍या करूँ ? अफसोस यह सपना मैं ना देख सका, फिर आज मैंने जागती आँखों से सपना देखा, मेरे प्रशन पर वह बोले तुम अपने पिछले हफते की व्‍यसतता को याद करो, तुम्‍हें मेरा उत्‍तर अपने आप मिल जायेगा, कल जब मुझे ब्लाग जगत में &lt;a href="http://mahashaktigroup.bharatuday.in/2009/09/blog-post_1446.html"&gt;वायरस &lt;/a&gt;कहा गया, &lt;a href="http://swachchhsandesh.blogspot.com/2009/09/blog-post_29.html"&gt;ब्लागवाणी बंद &lt;/a&gt;होना‍ जो मुझे Rank-2 ब्लागर होते हुये भी रजिसट्रेशन देने से कांपती है ऐसी बातों को याद करता गया, &lt;a href="http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2009/09/nestle-foods-gm-content-and-consumer.html"&gt;चिपलूनकर साहब की पोस्ट &lt;/a&gt;पर जाकर दिल दिमाग हर तरफ से यही आवाज़ आयी कि गाँधी जी का इशारा उस ओर हे जिस पोस्ट पर हिन्‍दू-मुस्लिम ही नहीं सर्वोधर्म का अनूखा प्रेम देखने को मिला था, सोचा गाँधी जयन्ती पर उसके लिये गाँधी समर्थकों से समर्थन मांगा जाये, किया मैं गलत हूं अपने विचारों से नवाजि़ये &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;क्या "नेस्ले" कम्पनी, भारत के बच्चों को "गिनीपिग" समझती है?:&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2009/09/nestle-foods-gm-content-and-consumer.html"&gt;please comments that post&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SsXchVUCULI/AAAAAAAAAPA/fzo1l1LQUIM/s1600-h/nestle-ke-andar.gif"&gt;&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 136px; height: 150px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SsXchVUCULI/AAAAAAAAAPA/fzo1l1LQUIM/s400/nestle-ke-andar.gif" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5387954994433642674" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SsXchJQccJI/AAAAAAAAAO4/m3Wmtksi8xw/s1600-h/nesle1.jpg"&gt;&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 199px; height: 200px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SsXchJQccJI/AAAAAAAAAO4/m3Wmtksi8xw/s400/nesle1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5387954991197352082" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    &lt;a href="http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2009/09/nestle-foods-gm-content-and-consumer.html"&gt; ब्लागस्‍पाट पर सबसे सफल और सार्थक बहस, जिसकी बुरी नजर से बचाय रखने की गारंटी, किसी ने इस कम्‍पनी का दूध पी रखा हो तो आजाये सांकल खुली है&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;----&lt;br /&gt;मेरे गाँधी से संबन्धित &lt;strong&gt;प्‍यार बढाने वाले लेख&lt;/strong&gt; गाँधी जी &lt;a href="http://islaminhindi.blogspot.com/2009/09/tipu-sultan.html"&gt;कहते थे टीपु सुल्‍तान हिन्‍दू हित में अधिक था&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;गाँधी जी के गवर्नर मित्र का औंरंगज़ेब बार में लेख, &lt;a href="http://islaminhindi.blogspot.com/2009/07/aurangzeb.html"&gt;औंरंगज़ेब ने मन्दिर तोडा तो मस्जिद भी तोडी&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://meratajarba.blogspot.com/2009/10/blog-post.html#comments"&gt;Use comments Power&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7189779905817347363-5633591227807469103?l=meratajarba.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://meratajarba.blogspot.com/feeds/5633591227807469103/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7189779905817347363&amp;postID=5633591227807469103&amp;isPopup=true' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7189779905817347363/posts/default/5633591227807469103'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7189779905817347363/posts/default/5633591227807469103'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://meratajarba.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='गाँधी जयन्ती पर आओ याद करें उस पोस्ट को जिस में सर्वोधर्म प्रेम देखने को मिला था'/><author><name>Umar Kairanvi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00958476404864434157</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SXlfeinhAII/AAAAAAAAAEA/oKeD8XaDgi4/S220/umarkairanvi1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SsXchVUCULI/AAAAAAAAAPA/fzo1l1LQUIM/s72-c/nestle-ke-andar.gif' height='72' width='72'/><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7189779905817347363.post-8302328539231670553</id><published>2009-06-10T03:42:00.000-07:00</published><updated>2009-06-10T05:07:16.047-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='new muslim women'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='kamla surayya das'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='writer'/><title type='text'>'दुनिया सुन ले कि मैंने इस्लाम क़बूल कर लिया है' -- कमला</title><content type='html'>'कमला सुरैया chitthajagat' गूगल में सर्च करो तो सामने आता है 'कमला दास सुरैया की कविताओं में कुत्ता', मैंने antimawtar.blogspot.com को कुछ समय के लिये छोडा और ले आया ऐसा लेख जो कमला जी से संबन्धित बकवास का उत्तर भी है,=== हिन्दी जगत जानले कुत्ता इसलाम में नापसन्दीदा जानवर है, मुसलिम इसे शौकिया नहीं पाल सकता, हिफाज्रत की नीयत से पाला जा सकता है इससे दूरी बनाये रखनी तब भी होगी, कुत्ता से संबंन्धित स्वगींय कमला जी की कविताओं बारे में अनुमान से कह सकता हू कि वह इस्लाम कबूल करने से पहले की होंगी, क्‍योंकि उन्‍होंने एक इन्टरवयू में कहा था कि ‘मैं आगे केवल खुदा की तारीफ पर आधारित कविताएँ लिखूँगी।'&lt;br /&gt;दूसरे कामेंटसः &lt;br /&gt;&lt;a href="http://74.125.153.132/search?q=cache:CJyFv4H0Hr8J:mobile.dw-world.de/hindi/mobile.A-4293530-629.html+%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE+%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE&amp;cd=7&amp;hl=en&amp;ct=clnk&amp;gl=in"&gt;कमला सुरैया के जन्म की तारीख भी 31(मार्च)थी और उनका निधन भी 31(मई)2009 तारीख को हुआ.&lt;br /&gt;इस्लाम धर्म स्वीकार करने के पीछे उन्होंने अपना इरादा और फ़ैसला कभी वास्तविक तौर पर ज़ाहिर नहीं किया.&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; उपरोक्त लेख के लेखक को भी वास्‍तविक तौर पर इस लेख से पता चल जायेगा क्‍यूं कमला जी इस्लाम में गईं, &lt;br /&gt;जन्‍म की तारीख और निधन की तारीख लिखकर हमें कितनी खुशी दी इस लेखक ने,, ऐसा केवल मुहम्मद सल्ल. के साथ हुआ कि जन्म और निधन की तारीख एक हों, अल्लाह जन्नत नसीब करे इस बेबाक लेखिका को,आमीन--- मुहम्‍मद उमर कैरानवी&lt;br /&gt;islaminhindi.blogspot.com &lt;br /&gt;0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0.0&lt;br /&gt;   स्वगींय श्रीमती डाक्टर कमला सुरैया(केरल, भारत) (पारिवारिक नाम डाक्टर कमलादास) उपन्यासकार हैं, कवयित्री हैं और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध् लेखिका और शोधकर्ता हैं। उन्होंने 12 दिसम्बर 1999 ई. को इस्लाम स्वीकार किया तो भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के धार्मिक और शैक्षिक क्षेत्रों में तहलका मच गया। नीचे उनके इस्लाम क़बूल करने की घटना ब्यान की जा रही है। यह लेख कई अलग-अलग लेखों की सहायता से तैयार किया गया है।&lt;br /&gt;........&lt;br /&gt; डाक्टर कमला सुरैया 1934 ई. में दक्षिणी भारत के केरल राज्य के एक इलाक़े पन्ना पूरकलम (जनपद थ्रेसर) में पैदा हुईं। उनका सम्बन्ध नायर जाति के एक अमीर हिन्दू घराने से है। उनकी माँ निलापत बिलामनी मलयालम भाषा की कवयित्री थीं, जबकि पिता बी. एम. नायर प्रसिद्ध पत्रकार थे और एक ही समय में दो पत्रिकाओं के सम्पादक थे। उनके पति स्वर्गीय मध्वादास इण्टरनेशनल मानीटरी फण्ड (IMF) के सीनियर कंसलटेंट थे।&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/Si-QH6ZgYcI/AAAAAAAAANU/Yf8WKKPsNNo/s1600-h/kamla_pic.jpg"&gt;&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 191px; height: 250px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/Si-QH6ZgYcI/AAAAAAAAANU/Yf8WKKPsNNo/s400/kamla_pic.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5345649748321788354" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; खुद डाक्टर कमला सुरैया एक समय तक अंग्रज़ी की अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिका इलस्ट्रेटेड वीकली आफ़ इण्डिया की सम्पादक कमेटी में शामिल रहीं। वे केरल की चिल्डेªªन फिल्म सोसाइटी की अध्यक्ष थीं। केरल के फारेस्ट्री बोर्ड की चेयर पर्सन थीं और मासिक पत्रिका ‘पोयट‘ की ओरिऐंट एडीटर थीं।&lt;br /&gt; डाक्टर सुरैया एक ही समय मलयालम और अंग्रेज़ी भाषाओं में लिखती हैं। वे उपन्यासकार भी हैं, कहानीकार भी और कवयित्री भी। इस प्रकार विभिन्न हवालों से मलयालम में उनकी बीस से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं और बहुत पसन्द की गई हैं। इनके नावल 'Entekatha' का पन्द्रह विदेशी भाषाओं में अनूवाद हो चुका है। इसी प्रकार अंग्रज़ी में उनकी पाँच किताबें हैं और बडी लोकप्रिय हुई हैं। 1964 ई. में इन्हें ‘एशियन पोएटरी प्राइज़‘ दिया गया। 1965 ई. में इन्हें केंट अवार्ड, एशियन वल्र्ड प्राइज़ और एकेडमी अवार्ड दिए गए। 1967 ई. में इन्हें 'Vayalar' अवार्ड मिला। जबकि 1969 ई. में उनके कथा-लेखन पर उन्हें केरल साहित्य एकेडमी अवार्ड का सम्मान मिला। कई देशी और विदेशी यूनीवर्सिटियों ने इन्हें डाक्‍ट्रेट की मानद डिग्रियाँ प्रदान की हैं।&lt;br /&gt; इन आसाधरण शैक्षिक, साहित्यिक तथा लेखन और शोध सम्बन्धी योग्यताओं के साथ इस प्रसिद्ध महिला ने 12 दिसम्बर 1999 ई. को केरल के शहर कोचीन में एक शैक्षिक एवं साहित्यिक समारोह को सम्बोधित करते हुए उपमहाद्वीप के राजनीतिक, धार्मिक और शैक्षिक क्षेत्रों में इस रहस्योद्घाटन से सनसनी फैला दीः ‘‘दुनिया सुन ले कि मैंने इस्लाम क़बूल कर लिया है, इस्लाम जो मुहब्बत, अमन और शान्ति का दीन हैं, इस्लाम जो सम्पूर्ण जीवन व्यवस्था है, और मैंने यह फैसला भावुकता या सामयिक आधारों पर नहीं किया है, इसके लिए मैंने एक अवधि तक बडी गम्भीरता और ध्यानपूर्वक गहन अध्ययन किया है और मैं अंत में इस नतीजे पर पहुँची  हूँ कि अन्य असंख्य खूबियों के अतिरिक्त इस्लाम औरत को सुरक्षा का एहसास प्रदान करता है और में इसकी बडी ही जरूरत महसूस करती थी...... इसका एक अत्यन्त उज्जवल पक्ष यह भी है कि अब मुझ अनगिनत खुदाओं के बजाये एक और केवल एक खुदा की उपासना करनी होगी। यह रमज़ान का महीना है। मुसलमानों का अत्यन्त पवित्र महीना और मैं खुश हूँ कि इस अत्यन्त पवित्र महीने में अपनी आस्थाओं में क्रान्तिकारी परिवर्तन कर रही हूँ तथा समझ-बूझ और होश के साथ एलान करती  हूँ कि अल्लाह के अलावा कोई पूज्य नहीं और मुहम्मद (सल्ल.) अल्लाह के रसूल (दूत) हैं। अतीत में मेरा कोई अक़ीदा नहीं था। मूर्ति पूजा से बददिल होकर मैंने नास्तिकता अपना ली थी, लेकिन अब मैं एलान करती हूँ कि मैं एक अल्लाह की उपासक बनकर रहूँगी और धर्म और समुदाय के भेदभव के बगैर उसके सभी बन्दों से मुहब्बत करती रहूँगी ।&lt;br /&gt; बाद में एक टेलीवीज़न इंटरव्यू में इन्होंने स्पष्ट किया, ‘‘मैंने किसी दबाव में आकर इस्लाम कत्रबूल नहीं किया है, यह मेरा स्वतंत्र फैसला है और मैं इस पर किसी आलोचना की कोई परवाह नहीं करती। मैंने फौरी तौर पर घर से बुतों और मूर्तियों को हटा दिया है और ऐसा महसूस करती हूं जैसे मुझे नया जन्म मिला है।‘‘&lt;br /&gt; ‘‘टाइम्ज़ आफ इण्डिया’’ को इंटरव्यू देते हुए 15 दिसम्बर 1999 ई. को डाक्टर सुरैया कमला ने कहा, ‘‘इस्लामी शिक्षाओं में बुरक़े ने मुझे बहुत प्रभावित किया अर्थात वह लिबास जो मुसलमान औरतें आमतौर पर पहनती हैं। हकीकत यह है कि बुरका बडा ही जबरदस्त लिबास और असाधारण चीज़ है। यह औरत को मर्द की चुभती हुई नज़रों से सुरक्षित रखता है और एक खास किस्म की सुरक्षा की भावना प्रदान करता है।’’ उन्होंने और व्याख्या की, ‘‘आपको मेरी यह बात बडी अजीब लगेगी कि मैं नाम-निहाद आज़ादी से तंग आ गई हूँ। मुझे औरतों के नंगे मुह, आज़ाद चलत-फिरत तनिक भी पसन्द नहीं। मैं चाहती हूँ कि कोई मर्द मेरी ओर घूर कर न देखे। इसी लिए यह सुनकर आपको आश्चय्र होगा कि मैं पिछले चैबीस वर्षों से समय-समय पर बुरका औढ रही हूँ,  शापिंग के लिए जाते हुए, सांस्कृतिक समारोहों में भाग लेते हुए, यहाँ तक कि विदेशों की यात्राओं में मैं अक्सर बुरका पहन लिया करती थी और एक खास किस्म की सुरक्षा की भावना से आनन्दित होती थी। मैंने देखा कि पर्देदार औरतों का आदर-सम्मान किया जाता है और कोई उन्हें अकारण परेशान नहीं करता।’’&lt;br /&gt; डाक्टर सुरैया ने आगे कहा, ‘‘इस्लाम ने औरतों को विभिन्न पहलुओं से बहुत-सी आज़ादियाँ दे रखी हैं, बल्कि जहाँ तक बराबरी की बात है इतिहास के किसी युग में दुनिया के किसी समाज ने मर्द और औरत की बराबरी का वह एहतिमाम नहीं किया जो इस्लाम ने किया है। इसको मर्दों के बराबर अधिकारों से नवाज़ा गया है। माँ, बहन, बीवी और बेटी अर्थात इसका हर रिश्ता गरिमापूर्झा औ सम्माननीय है। इसको बाप, पति और बेटों की जायदाद में भागीदार बनाया गया है और घर में वह पति की प्रतिनिधि और कार्यवाहिका है। जहाँ तक पति के आज्ञापालन का बात है यह घर की व्यवस्था को ठीक रखते के लिए आवश्यक है और मैं इसको न गुलामी समझती हुँ और स्वतंत्रताओं की अपेक्षाओं का उल्लंघन समझती हुँ। इस प्रकार के आज्ञापालन और अनुपालन के बगैर तो किसी भी विभग की व्यवस्था शेष नही रह सकती और इस्लाम तो है ही सम्पूर्ण अनुपालन और सिर झुकाने का नाम, अल्लाह के सामने विशुद्ध बन्दगी का नाम। अल्लाह के रसूल (सल्ल.) की सच्ची पैरवी का नाम, यही गुलामी तो सच्ची आजादी की गारंटी देती है, वरना इन्सान तो जानवर बन जाए और जहाँ चाहे, जिस खेती में चाहै मुँह मारता फिरे। अतः इस्लाम और केवल इस्लाम औरत की गरिमा, स्थान और श्रेणी का लिहाज़ करता है। हिन्दू धर्म में ऐसी कोई सुविधा दूर-दूर तक नज़र नहीं आती।&lt;br /&gt; डाक्टर सुरैया कमला को इस्लाम कबूल करने के लिए 27 वर्ष तक इन्तिज़ार करना पडा। वह सत्तर के दशक में इस्लाम से प्रभावित हुईं और इस सम्बन्ध में अपने पति से वार्ता करती रहीं जिन्होंने जवाब में एतिराज़ या मुखालफत का अन्दाज़ नहीं अपनाया, बल्कि सुझाव दिया कि किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले उन्हें इस्लाम के बारे में विस्तृत और गहन अध्ययन करना चाहिए। उनके तीनों बेटों का रवैया भी सकारात्मक रहा। इसी लिए जब उनकी माँ ने इस्लाम क़बूल करने का एलान किया तो तीनों बेटे कोचीन पहुँच गए, ताकि सम्भावित विरोध का मिलकर मुकाबला किया जा सके। तीनों बेटों की प्रतिक्रिया थी, ‘‘हमें अपनी माँ के फैसल से र्कोइ तमभेद नहीं। वह हमारी माँ है, चाहे वे हिन्दू हो, ईसाई हों, या मुसलमान, हम हर हाल में उनका साथ देंगे और उनके सम्मान में कोई कमी नहीं आने देंगे। ‘‘ बेटों के आज्ञापालन का उल्लेख करते हुए डाक्टर सुरैया ने बताया, ‘‘मेरे बेटों ने कह दिया है कि अगर आप खुश हैं तो हम भी इस्लाम कबूल करने पर तैयार हैं।‘‘&lt;br /&gt; इस्लाम क़बूल करने के बाद कटटर-पंथी हिन्दुओं की ओर से धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया। पत्रों में और टेलिफोन पर गालियाँ दी जातीं। श्रीमती के बेटे एम. डी फलाइड ने बताया, ‘‘हमने इस बारें में कई फोन सुने हैं, एक व्यक्ति ने धमकी दी, ‘‘चैबीस घंटे के अन्दर इसको कत्ल कर दूँगा।‘‘ लेकिन डाक्टर सुरैया जवाब में खामोश थी। ‘‘मैंने सभी मामले अल्लाह पर छोड दिए हैं, वही हमारी सुरक्षा करने वाला है।’’&lt;br /&gt; उन्हें दुनिया भर के मुसलमानों की ओर से बधाई सन्देश प्राप्त होते रहे और वे बड़ी सच्चाई, मुहब्बत और गरमजोशी से उन्हें अपने समर्थन का यकीन दिलाते रहे। इससे मेरे इस विश्वास को ताक़त मिली है कि इस्लाम मुहब्बत औ इख़्लास का मज़हब है। मेरी इच्छा है कि बहुत जल्द इस्लाम के केन्द्र पवित्र शहर मक्का और मदीना की यात्रा करूँ और वहाँ की पवित्र मिटटी को चूमूँ। अपने बारे में उनकी कविताओं, कहानियों और विभिन्न इंटरव्यूज से पता चलता है कि उन्होंने इस्लाम क़बूल करने का निर्णय अचानक नहीं किया, जैसा कि ऊपर इशरा किया जा चुका है। करीब 28 वर्ष पूर्व इस्लाम धर्म के प्रति उनकी रूचि का आरम्भ उस समय हुआ जब उन्होंने दो यतीम मुस्लिम बच्चों.... इम्तियाज और इरशाद को लेपालक बना लिया । उन्होंने इन बच्चों को हिन्दू की हैसियत से पालन-पोषण करने के बजाये मुसलमान के रूप में प्रशिक्षित करने का फैसला किया। उनके लिए इस्लामी शिक्षा की व्यवस्था की और खुद भी इस्लाम और इस्लाम के इतिहास के बारे में अध्ययन आरम्भ कर दिया और फिर गम्भीरतापूर्वक और गहराई के साथ अपनी जानकारी में वृद्धि करती चली गईं। इस मकसद के लिए उन्होंने मुस्लिम परिवारों से सम्बन्ध बढा लिए। जिससे इस्लाम के बारें में उनकी एकाग्रता बढती गई। इसका उल्लेख उन्होंने विद्वान पति मधुवादास से किया, वे धर्म से विरक्त और निर्पेक्ष थे। उन्होंने सुझाव दिया कि इस्लाम के बारे में अधिक से अधिक अध्ययन करें और मन में पैदा होने वाली छोटी-से-छोटी आशंकाओं का जवाब हासिल करें। इसलिए जब उन्हें पूर्णतः संतुष्टि हो गई, मन सन्तुष्ट हो गया तो उन्होंने इस्लाम क़बूल करने का एलान कर दिया।&lt;br /&gt; एक इंटरव्यू में ‘‘खलीज टाइम्ज‘‘ ने उनसे पूछा कि इस्लाम कबूल करने पर उनके जानने वालों और वर्तमान लेखकों की क्या प्रतिक्रिया थी, तो उन्होंने बताया, बहुत ही कम लोगों ने विरोध किया। बस कुछेक लोगों ने बुरा माना और मुझे उनकी कोई परवाह नहीं। धमकियाँ देनेवालों के बारे में कहा, ‘‘मैं तनिक भी उनसे भयभीत न हुई स्थानीय पुलिस के अधिकारियों ने मुझे गार्ड की पेशकश की। लेकिन मैंने उन्हें बता दिया है कि मुझे ऐसे किसी इन्तिज़ाम की ज़रूरत हीं। मुझे कूवल अल्लाह की हस्ती पर भरोसा है, वहीं मेरी सुरक्षा करेगा।‘‘ इसलिए यह बात ईमान को बढानेवाली है कि वे अपने ही घर में निवास करती रहीं और उन्होंने मामूली से सुरक्षा प्रबन्ध भी नहीं किए।&lt;br /&gt; ‘‘खलीज टाइम्ज़’’ ही से बातें करते हुऐ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अब बाक़ायदा पर्दा अपना लिया है और ऐसा लगता है कि जैसे बुरका बुलेटप्रूफ जैकेट है जिसमें और मर्दों की हवसनाक नज़रों से भी सुरक्षित रहती है और उनकी शरारतों से भी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस्लाम ने नहीं, बल्कि सामाजिक अन्यायों ने औरतों के अधिकार छीन लिए हैं। इस्लाम तो औरतों के अधिकारों का सबसे बडा रक्षक है।‘‘ उन्होंने बडे विश्वास के साथ कहा, ‘‘इस्लाम मेरे लिए दुनिया की सबसे कीमती पूँजी है। यह मुझे जानसे बढकर प्रिय है और इसके लिए बडी से बडी कुरबानी दी जा सकती है।’’&lt;br /&gt; जहाँ तक इस्लामी शिक्षाओं पर अमल की बात है। डाक्टर सुरैया कमला ने कहा, ‘‘मुझे हर अच्छे मुसलमान की तरह इस्लाम की एक-एक शिक्षा से गहरी मुहब्बत है। मैंने इसे दैनिक जीवन में व्यवहारिक रूप से अपना लिया है और धर्म के मुकाबले में दौलत मेरे नज़दीक बेमानी चीज़ है।’’ अपनी शायरी के हवाले से उन्होंने बताया, ‘‘मैं आगे केवल खुदा की तारीफ पर आधारित कविताएँ लिखूँगी। अल्लाह ने चाहा तो ईश्वर की प्रशंसा पर आधरित कविताओं की एक किताब बहुत जल्द सामने आ जाएगी।’’&lt;br /&gt; इस्लाम क़बूल करने के बाद डाक्टर सुरैया कमला ने बहुत से समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और इलेक्ट्रानिक मीडिया को इंटरव्यूज़ दिए। हर इंटरव्यू में उन्होंने इस इरादे का इज़हार किया कि वे दुनिया पर इस्लामी शिक्षाओं की सच्चाई को उजागर करेंगी। ‘खलीज टाइम्ज‘ से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘में इस्लाम का परिच नई सदी के एक जिन्दा और सच्चे धर्म की हैसियत से कराना चाहती हूँ। जिसकी बुनियादें बुद्धि, साइंस और सच्चाइयों पर आधारित हैं। मेरा इरादा है कि अब मैं शायरी को अल्लाह के गुणगान के लिए अर्पित कर दूँ और कुरआन के बारें में अधिक से अधिक जानकारी हासिल करलूँ और उन इस्लामी शिक्षाओं से अवगत हो जाऊँ जो दैनिक जीवन में रहनुमाई का सबब बनती हैं। मेरे नज़दीक इस्लाम की रूह यह है कि एक सच्चे मुसलमान को दूसरों की अधिक से अधिक सेवा करनी चाहिए। अल्लाह का शक्र है कि में पहले से भी इस पर कार्यरत हूँ और आगे भी यही तरीक़ा अपनाउँगी। अतः इस सम्बन्ध में मैं खुदा के बन्दों तक इस्लाम की बरकतें पहुँचाने का इरादा रखती हूँ। मैं जानती हूँ कि इस्लाम की नेमत मिल जाने के बाद मैं खुशी और इत्मीनान के जिस एहसास से परिचित हुई हूँ उसे सारी दुनिया तक पहुँचा दूँ। सच्चाई यह है कि इस्लाम क़बूल करने के बाद मुझे जो इत्मीनान और सुकून हासिल हुआ है और खुशी की जिस कैफियत से मैं अवगत हुई हूँ, उसे बयान करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। इसके साथ ही मुझे सुरक्षा का एहसास भी प्राप्त हुआ है। मैं बडी उम्र की एक औरत हूँ और सच्ची बात यह है कि इस्लाम कुबूल करने से पहले जीवन भर बेखौफी का ऐसा खास अन्दाज़ मेरे तजुर्बे में नहीं आया। सुकून, इत्मीनान, खुशी और बेखौफी की यह नेमत धन-दौलत से हरगिज नहीं मिल सकती। इसी लिए दौलत मेरी नज़रों में तुच्छ हो गई है।‘‘&lt;br /&gt; खुशी और इत्मीनान के इस एहसास को उन लाखों बधाई सन्देशों ने और अधिक बढा दिया जो उन्हें दुनिया भर से मिलते रहे, खलीज टाइम्ज़ के रिपोर्टर के मुताबिक उनके टेलिफोन की घंटी दिन भर बजती रतही है। इस्लाम के मानने वाले उनकी खुशियों में जी भरके शरीक होते रहे।&lt;br /&gt;साभारः&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/Si-P3O4vfLI/AAAAAAAAANM/3dtKk3NQHpg/s1600-h/hamen-khuda-kese-mila.jpg"&gt;&lt;img style="cursor:pointer; cursor:hand;width: 142px; height: 220px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/Si-P3O4vfLI/AAAAAAAAANM/3dtKk3NQHpg/s400/hamen-khuda-kese-mila.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5345649461763734706" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  ‘&lt;a href="http://www.4shared.com/file/90291497/fe7ebb77/hindi-book-hemen-khuda-kese-milihindi.html"&gt;‘हमें खुदा कैसे मिला’’ मधुर संदेश संगम,&lt;/a&gt; दिल्ली-25, पृष्ठ 94 से 100 तक &lt;br /&gt;(80 नव-मुल्लिम महिलाओं की दास्तान की यह पुस्तक ब्‍लाग islaminhindi.blogspot.com पर पीडीफ में उपलब्‍ध)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7189779905817347363-8302328539231670553?l=meratajarba.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://meratajarba.blogspot.com/feeds/8302328539231670553/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7189779905817347363&amp;postID=8302328539231670553&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7189779905817347363/posts/default/8302328539231670553'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7189779905817347363/posts/default/8302328539231670553'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://meratajarba.blogspot.com/2009/06/blog-post.html' title='&apos;दुनिया सुन ले कि मैंने इस्लाम क़बूल कर लिया है&apos; -- कमला'/><author><name>Umar Kairanvi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00958476404864434157</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SXlfeinhAII/AAAAAAAAAEA/oKeD8XaDgi4/S220/umarkairanvi1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/Si-QH6ZgYcI/AAAAAAAAANU/Yf8WKKPsNNo/s72-c/kamla_pic.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7189779905817347363.post-2726555542530769539</id><published>2009-04-29T03:03:00.000-07:00</published><updated>2009-05-22T14:06:25.520-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='इतिहास'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बनारस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='औरंगज़ेब'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' 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अनुदान दिया था। मैंने सोचा कि ये फ़रमान जाली होंगे। मुझे आश्चर्य हुआ कि यह कैसे हो सकता है कि औरंगज़ेब जो मन्दिरों को तोडने के लिए प्रसिद्ध है, वह एक मन्दिर को यह कह कर जागीर दे सकता हे यह जागीर पूजा और भोग के लिए दी जा रही है। आखि़र औरंगज़ेब कैस बुतपरस्ती के साथ अपने को शरीक कर सकता था। मुझे यक़ीन था कि ये दस्तावेज़ जाली हैं, परन्तु कोई निर्णय लेने से पहले मैंने डा. सर तेज बहादुर सप्रु से राय लेना उचित समझा। वे अरबी और फ़ारसी के अच्छे जानकार थे। मैंने दस्तावेज़ें उनके सामने पेश करके उनकी राय मालूम की तो उन्होंने दस्तावेज़ों का अध्ययन करने के बाद कहा कि औरंगजे़ब के ये फ़रमान असली और वास्तविक हैं। इसके बाद उन्होंने अपने मुन्शी से बनारस के जंगमबाडी शिव मन्दिर की फ़ाइल लाने को कहा। यह मुक़दमा इलाहाबाद हाईकोर्ट में 15 साल से विचाराधीन था। जंगमबाड़ी मन्दिर के महंत के पास भी औरंगज़ेब के कई फ़रमान थे, जिनमें मन्दिर को जागीर दी गई थी। इन दस्तावेज़ों ने औरंगज़ेब की एक नई तस्वीर मेरे सामने पेश की, उससे मैं आश्चर्य में पड़ गया। डाक्टर सप्रू की सलाह पर मैंने भारत के पिभिन्न प्रमुख मन्दिरों के महंतो के पास पत्र भेजकर उनसे निवेदन किया कि यदि उनके पास औरंगज़ेब के कुछ फ़रमान हों जिनमें उन मन्दिरों को जागीरें दी गई हों तो वे कृपा करके उनकी फोटो-स्टेट कापियां मेरे पास भेज दें। अब मेरे सामने एक और आश्चर्य की बात आई। उज्जैन के महाकालेश्वर मन्दिर, चित्रकूट के बालाजी मन्दिर, गौहाटी के उमानन्द मन्दिर, शत्रुन्जाई के जैन मन्दिर और उत्तर भारत में फैले हुए अन्य प्रमुख मन्दिरों एवं गुरूद्वारों से सम्बन्धित जागीरों के लिए औरंगज़ेब के फरमानों की नक़लें मुझे प्राप्त हुई। यह फ़रमान 1065 हि. से 1091 हि., अर्थात 1659 से 1685 ई. के बीच जारी किए गए थे। हालांकि हिन्दुओं और उनके मन्दिरों के प्रति औरंगज़ेब के उदार रवैये की ये कुछ मिसालें हैं, फिर भी इनसे यह प्रमाण्ति हो जाता है कि इतिहासकारों ने उसके सम्बन्ध में जो कुछ लिखा है, वह पक्षपात पर आधारित है और इससे उसकी तस्वीर का एक ही रूख सामने लाया गया है। भारत एक विशाल देश है, जिसमें हज़ारों मन्दिर चारों ओर फैले हुए हैं। यदि सही ढ़ंग से खोजबीन की जाए तो मुझे विश्वास है कि और बहुत-से ऐसे उदाहरण मिल जाऐंगे जिनसे औरंगज़ेब का गै़र-मुस्लिमों के प्रति उदार व्यवहार का पता चलेगा। औरंगज़ेब के फरमानों की जांच-पड़ताल के सिलसिले में मेरा सम्पर्क श्री ज्ञानचंद और पटना म्यूजियम के भूतपूर्व क्यूरेटर डा. पी एल. गुप्ता से हुआ। ये महानुभाव भी औरंगज़ेब के विषय में ऐतिहासिक दृस्टि से अति महत्वपूर्ण रिसर्च कर रहे थे। मुझे खुशी हुई कि कुछ अन्य अनुसन्धानकर्ता भी सच्चाई को तलाश करने में व्यस्त हैं और काफ़ी बदनाम औरंगज़ेब की तस्वीर को साफ़ करने में अपना योगदान दे रहे हैं। औरंगज़ेब, जिसे पक्षपाती इतिहासकारों ने भारत में मुस्लिम हकूमत का प्रतीक मान रखा है। उसके बारें में वे क्या विचार रखते हैं इसके विषय में यहां तक कि ‘शिबली’ जैसे इतिहास गवेषी कवि को कहना पड़ाः&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;तुम्हें ले-दे के सारी दास्तां में याद है इतना।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;कि औरंगज़ेब हिन्दू-कुश था, ज़ालिम था, सितमगर था।।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;औरंगज़ेब पर हिन्दू-दुश्मनी के आरोप के सम्बन्ध में जिस फरमान को बहुत उछाला गया है, वह ‘फ़रमाने-बनारस’ के नाम से प्रसिद्ध है। यह फ़रमान बनारस के मुहल्ला गौरी के एक ब्राहमण परिवार से संबंधित है। 1905 ई. में इसे गोपी उपाघ्याय के नवासे मंगल पाण्डेय ने सिटि मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया था। एसे पहली बार ‘एसियाटिक- सोसाइटी’ बंगाल के जर्नल (पत्रिका) ने 1911 ई. में प्रकाशित किया था। फलस्वरूप रिसर्च करनेवालों का ध्यान इधर गया। तब से इतिहासकार प्रायः इसका हवाला देते आ रहे हैं और वे इसके आधार पर औरंगज़ेब पर आरोप लगाते हैं कि उसने हिन्दू मन्दिरों के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया था, जबकि इस फ़रमान का वास्तविक महत्व उनकी निगाहों से आझल रह जाता है। यह लिखित फ़रमान औरंगज़ेब ने 15 जुमादुल-अव्वल 1065 हि. (10 मार्च 1659 ई.) को बनारस के स्थानिय अधिकारी के नाम भेजा था जो एक ब्राहम्ण की शिकायत के सिलसिले में जारी किया गया था। वह ब्राहमण एक मन्दिर का महंत था और कुछ लोग उसे परेशान कर रहे थे। फ़रमान में कहा गया हैः ‘‘अबुल हसन को हमारी शाही उदारता का क़ायल रहते हुए यह जानना चाहिए कि हमारी स्वाभाविक दयालुता और प्राकृतिक न्याय के अनुसार हमारा सारा अनथक संघर्ष और न्यायप्रिय इरादों का उद्देश्य जन-कल्याण को अढ़ावा देना है और प्रत्येक उच्च एवं निम्न वर्गों के हालात को बेहतर बनाना है। अपने पवित्र कानून के अनुसार हमने फैसला किया है कि प्राचीन मन्दिरों को तबाह और बरबाद नहीं किया जाय, बलबत्ता नए मन्दिर न बनए जाएँ। हमारे इस न्याय पर आधारित काल में हमारे प्रतिष्ठित एवं पवित्र दरबार में यह सूचना पहुंची है कि कुछ लोग बनारस शहर और उसके आस-पास के हिन्दू नागरिकों और मन्दिरों के ब्राहम्णों-पुरोहितों को परेशान कर रहे हैं तथा उनके मामलों में दख़ल दे रहे हैं, जबकि ये प्राचीन मन्दिर उन्हीं की देख-रेख में हैं। इसके अतिरिक्त वे चाहते हैं कि इन ब्राहम्णों को इनके पुराने पदों से हटा दें। यह दखलंदाज़ी इस समुदाय के लिए परेशानी का कारण है। इसलिए यह हमारा फ़रमान है कि हमारा शाही हुक्म पहुंचते ही तुम हिदायत जारी कर दो कि कोई भी व्यक्ति ग़ैर-कानूनी रूप से दखलंदाजी न करे और न उन स्थानों के ब्राहम्णों एवं अन्य हिन्दु नागरिकों को परेशान करे। ताकि पहले की तरह उनका क़ब्ज़ा बरक़रार रहे और पूरे मनोयोग से वे हमारी ईश-प्रदत्त सल्तनत के लिए प्रार्थना करते रहें। इस हुक्म को तुरन्त लागू किया जाये।’’ इस फरमान से बिल्कुल स्पष्ट हैं कि औरंगज़ेब ने नए मन्दिरों के निर्माण के विरूद्ध कोई नया हुक्म जारी नहीं किया, बल्कि उसने केवल पहले से चली आ रही परम्परा का हवाला दिया और उस परम्परा की पाबन्दी पर ज़ोर दिया। पहले से मौजूद मन्दिरों को ध्वस्त करने का उसने कठोरता से विरोध किया। इस फ़रमान से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि वह हिन्दू प्रजा को सुख-शान्ति से जीवन व्यतीत करने का अवसर देने का इच्छुक था। यह अपने जैसा केवल एक ही फरमान नहीं है। बनारस में ही एक और फरमान मिलता है, जिससे स्पष्ट होता है कि औरंगज़ेब वास्तव में चाहता था कि हिन्दू सुख-शान्ति के साथ जीवन व्यतीत कर सकें। यह फरमान इस प्रकार हैः ‘‘रामनगर (बनारस) के महाराजाधिराज राजा रामसिंह ने हमारे दरबार में अर्ज़ी पेश की हैं कि उनके पिता ने गंगा नदी के किनारे अपने धार्मिक गुरू भगवत गोसाईं के निवास के लिए एक मकान बनवाया था। अब कुछ लोग गोसाईं को परेशान कर रहे हैं। अतः यह शाही फ़रमान जारी किया जाता है कि इस फरमान के पहुंचते ही सभी वर्तमान एवं आने वाले अधिकारी इस बात का पूरा ध्यान रखें कि कोई भी व्यक्ति गोसाईं को परेशान एवं डरा-धमका न सके, और न उनके मामलें में हस्तक्षेप करे, ताकि वे पूरे मनोयोग के साथ हमारी ईश-प्रदत्त सल्तनत के स्थायित्व के लिए प्रार्थना करते रहें। इस फरमान पर तुरं अमल गिया जाए।’’ (तीरीख-17 बबी उस्सानी 1091 हिजरी) जंगमबाड़ी मठ के महंत के पास मौजूद कुछ फरमानों से पता चलता है कि औरंगज़ैब कभी यह सहन नहीं करता था कि उसकी प्रजा के अधिकार किसी प्रकार से भी छीने जाएँ, चाहे वे हिन्दू हों या मुसलमान। वह अपराधियों के साथ सख़्ती से पेश आता था। इन फरमानों में एक जंगम लोंगों (शैव सम्प्रदाय के एक मत के लोग) की ओर से एक मुसलमान नागरिक के दरबार में लाया गया, जिस पर शाही हुक्म दिया गया कि बनारस सूबा इलाहाबाद के अफ़सरों को सूचित किया जाता है कि पुराना बनारस के नागरिकों अर्जुनमल और जंगमियों ने शिकायत की है कि बनारस के एक नागरिक नज़ीर बेग ने क़स्बा बनारस में उनकी पांच हवेलियों पर क़ब्जा कर लिया है। उन्हें हुक्द दिया जाता है कि यदि शिकायत सच्ची पाई जाए और जायदा की मिल्कियत का अधिकार प्रमानिण हो जाए तो नज़ीर बेग को उन हवेलियों में दाखि़ल न होने दया जाए, ताकि जंगमियों को भविष्य में अपनी शिकायत दूर करवाने के लिएए हमारे दरबार में ने आना पडे। इस फ़रमान पर 11 शाबान, 13 जुलूस (1672 ई.) की तारीख़ दर्ज है। इसी मठ के पास मौजूद एक-दूसरे फ़रमान में जिस पर पहली नबीउल-अव्वल 1078 हि. की तारीख दर्ज़ है, यह उल्लेख है कि ज़मीन का क़ब्ज़ा जंगमियों को दया गया। फ़रमान में है- ‘‘परगना हवेली बनारस के सभी वर्तमान और भावी जागीरदारों एवं करोडियों को सूचित किया जाता है कि शहंशाह के हुक्म से 178 बीघा ज़मीन जंगमियों (शैव सम्प्रदाय के एक मत के लोग) को दी गई। पुराने अफसरों ने इसकी पुष्टि की थी और उस समय के परगना के मालिक की मुहर के साथ यह सबूत पेश किया है कि ज़मीन पर उन्हीं का हक़ है। अतः शहंशाह की जान के सदक़े के रूप में यह ज़मीन उन्हें दे दी गई। ख़रीफ की फसल के प्रारम्भ से ज़मीन पर उनका क़ब्ज़ा बहाल किया जाय और फिर किसीप्रकार की दखलंदाज़ी न होने दी जाए, ताकि जंगमी लोग(शैव सम्प्रदाय के एक मत के लोग) उसकी आमदनी से अपने देख-रेख कर सकें।’’ इस फ़रमान से केवल यही ता नहीं चलता कि औरंगज़ेब स्वभाव से न्यायप्रिय था, बल्कि यह भी साफ़ नज़र आता है कि वह इस तरह की जायदादों के बंटवारे में हिन्दू धार्मिक सेवकों के साथ कोई भेदभा नहीं बरता था। जंगमियों को 178 बीघा ज़मीन संभवतः स्वयं औरंगज़ेब ही ने प्रान की थी, क्योंकि एक दूसरे फ़रमान (तिथि 5 रमज़ान, 1071 हि.) में इसका स्पष्टीकरण किया गया है कि यह ज़मीन मालगुज़ारी मुक्त है। औरंगज़ेब ने एक दूसरे फरमान (1098 हि.) के द्वारा एक-दूसरी हिन्दू धार्मिक संस्था को भी जागीर प्रदान की। फ़रमान में कहा गया हैः ‘‘बनारस में गंगा नदी के किनारे बेनी-माधो घाट पर दो प्लाट खाली हैं एक मर्क़जी मस्जिद के किनारे रामजीवन गोसाईं के घर के सामने और दूसरा उससे पहले। ये प्लाट बैतुल-माल की मिल्कियत है। हमने यह प्लाट रामजीवन गोसाईं और उनके लड़के को ‘‘इनाम’ के रूप में प्रदान किया, ताकि उक्त प्लाटों पर बाहम्णें एवं फ़क़ीरों के लिए रिहायशी मकान बनाने के बाद वे खुदा की इबादत और हमारी ईश-प्रदत्त सल्तनत के स्थायित्व के लिए दूआ और प्रार्थना कने में लग जाएं। हमारे बेटों, वज़ीरों, अमीरों, उच्च पदाधिकारियों, दरोग़ा और वर्तमान एवं भावी कोतवालों के अनिवार्य है कि वे इस आदेश के पालन का ध्यान रखें और उक्त प्लाट, उपर्युक्त व्यक्ति और उसके वारिसों के क़ब्ज़े ही मे रहने दें और उनसे न कोई मालगुज़ारी या टैक्स लिया जसए और न उनसे हर साल नई सनद मांगी जाए।’’ लगता है औरंगज़ेब को अपनी प्रजा की धार्मिक भावनाओं के सम्मान का बहुत अधिक ध्यान रहता था। हमारे पास औरंगज़ेब का एक फ़रमान (2 सफ़र, 9 जुलूस) है जो असम के शह गोहाटी के उमानन्द मन्दिर के पुजारी सुदामन ब्राहम्ण के नाम है। असम के हिन्दू राजाओं की ओर से इस मन्दिर और उसके पुजारी को ज़मीन का एक टुकड़ा और कुछ जंगलों की आमदनी जागीर के रूप में दी गई थी, ताकि भोग का खर्च पूरा किया जा सके और पुजारी की आजीविका चल सके। जब यह प्रांत औरंगजेब के शासन-क्षेत्र में आया, तो उसने तुरंत ही एक फरमान के द्वारा इस जागीर को यथावत रखने का आदेश दिया। हिन्दुओं और उनके धर्म के साथ औरंगज़ेब की सहिष्ण्ता और उदारता का एक और सबूत उज्जैन के महाकालेश्वर मन्दिर के पुजारियों से मिलता है। यह शिवजी के प्रमुख मन्दिरों में सेे एक है, जहां दिन-रात दीप प्रज्वलित रहता है। इसके लिए काफ़ी दिनों से पतिदिन चार सेर घी वहां की सरकार की ओर से उपलब्ध कराया जाथा था और पुजारी कहते हैं कि यह सिलसिला मुगल काल में भी जारी रहा। औरंगजेब ने भी इस परम्परा का सम्मान किया। इस सिलसिले में पुजारियों के पास दुर्भाग्य से कोई फ़रमान तो उपलब्ध नहीं है, परन्तु एक आदेश की नक़ल ज़रूर है जो औरंगज़ब के काल में शहज़ादा मुराद बख़्श की तरफ से जारी किया गया था। (5 शव्वाल 1061 हि. को यह आदेश शहंशाह की ओर से शहज़ादा ने मन्दिर के पुजारी देव नारायण के एक आवेदन पर जारी किया था। वास्तविकता की पुष्टि के बाद इस आदेश में कहा गया हैं कि मन्दिर के दीप के लिए चबूतरा कोतवाल के तहसीलदार चार सेर (अकबरी घी प्रतिदिन के हिसाब से उपल्ब्ध कराएँ। इसकी नक़ल मूल आदेश के जारी होने के 93 साल बाद (1153 हिजरी) में मुहम्मद सअदुल्लाह ने पुनः जारी की। साधारण्तः इतिहासकार इसका बहुत उल्लेख करते हैं कि अहमदाबाद में नागर सेठ के बनवाए हुए चिन्तामणि मन्दिर को ध्वस्त किया गया, परन्तु इस वास्तविकता पर पर्दा डाल देते हैं कि उसी औरंगज़ेब ने उसी नागर सेठ के बनवाए हुए शत्रुन्जया और आबू मन्दिरों को काफ़ी बड़ी जागीरें प्रदान कीं। निःसंदेह इतिहास से यह प्रमाण्ति होता हैं कि औरंगजेब ने बनारस के विश्वनाथ मन्दिर और गोलकुण्डा की जामा-मस्जिद को ढा देने का आदेश दिया था, परन्तु इसका कारण कुछ और ही था। विश्वनाथ मन्दिर के सिलसिले में घटनाक्रम यह बयान किया जाता है कि जब औरंगज़ेब बंगाल जाते हुए बनारस के पास से गुज़र रहा था, तो उसके काफिले में शामिल हिन्दू राजाओं ने बादशाह से निवेदन किया कि वहा। क़ाफ़िला एक दिन ठहर जाए तो उनकी रानियां बनारस जा कर गंगा दनी में स्नान कर लेंगी और विश्वनाथ जी के मन्दिर में श्रद्धा सुमन भी अर्पित कर आएँगी। औरंगज़ेब ने तुरंत ही यह निवेदन स्वीकार कर लिया और क़ाफिले के पडाव से बनारस तक पांच मील के रास्ते पर फ़ौजी पहरा बैठा दिया। रानियां पालकियों में सवार होकर गईं और स्नान एवं पूजा के बाद वापस आ गईं, परन्तु एक रानी (कच्छ की महारानी) वापस नहीं आई, तो उनकी बडी तलाश हुई, लेकिन पता नहीं चल सका। जब औरंगजै़ब को मालूम हुआ तो उसे बहुत गुस्सा आया और उसने अपने फ़ौज के बड़े-बड़े अफ़सरों को तलाश के लिए भेजा। आखिर में उन अफ़सरों ने देखा कि गणेश की मूर्ति जो दीवार में जड़ी हुई है, हिलती है। उन्होंने मूर्ति हटवा कर देख तो तहखाने की सीढी मिली और गुमशुदा रानी उसी में पड़ी रो रही थी। उसकी इज़्ज़त भी लूटी गई थी और उसके आभूषण भी छीन लिए गए थे। यह तहखाना विश्वनाथ जी की मूर्ति के ठीक नीचे था। राजाओं ने इस हरकत पर अपनी नाराज़गी जताई और विरोघ प्रकट किया। चूंकि यह बहुत घिनौना अपराध था, इसलिए उन्होंने कड़ी से कड़ी कार्रवाई कने की मांग की। उनकी मांग पर औरंगज़ेब ने आदेश दिया कि चूंकि पवित्र-स्थल को अपवित्र किया जा चुका है। अतः विश्नाथ जी की मूर्ति को कहीं और लेजा कर स्थापित कर दिया जाए और मन्दिर को गिरा कर ज़मीन को बराबर कर दिया जाय और महंत को मिरफतर कर लिया जाए। डाक्टर पट्ठाभि सीता रमैया ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘द फ़ेदर्स एण्ड द स्टोन्स’ मे इस घटना को दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणित किया है। पटना म्यूज़ियम के पूर्व क्यूरेटर डा. पी. एल. गुप्ता ने भी इस घटना की पुस्टि की है। गोलकुण्डा की जामा-मस्जिद की घटना यह है कि वहां के राजा जो तानाशाह के नाम से प्रसिद्ध थे, रियासत की मालगुज़ारी वसूल करने के बाद दिल्ली के नाम से प्रसिद्ध थे, रियासत की मालुगज़ारी वसूल करने के बाद दिल्ली का हिस्सा नहीं भेजते थे। कुछ ही वर्षाें में यह रक़म करोड़ों की हो गई। तानाशाह न यह ख़ज़ाना एक जगह ज़मीन में गाड़ कर उस पर मस्जिद बनवा दी। जब औरंज़ेब को इसका पता चला तो उसने आदेश दे दिया कि यह मस्जिद गिरा दी जाए। अतः गड़ा हुआ खज़ाना निकाल कर उसे जन-कल्याण के कामों मकें ख़र्च किया गया। ये दोनों मिसालें यह साबित करने के लिए काफ़ी हैं कि औरंगज़ेब न्याय के मामले में मन्दिर और मस्जिद में कोई फ़र्क़ नहीं समझता था। ‘‘दर्भाग्य से मध्यकाल और आधुनिक काल के भारतीय इतिहास की घटनाओं एवं चरित्रों को इस प्रकार तोड़-मरोड़ कर मनगढंत अंदाज़ में पेश किया जाता रहा है कि झूठ ही ईश्वरीय आदेश की सच्चाई की तरह स्वीकार किया जाने लगा, और उन लोगों को दोषी ठहराया जाने लगा जो तथ्य और पनगढंत बातों में अन्तर करते हैं। आज भी साम्प्रदायिक एवं स्वार्थी तत्व इतिहास को तोड़ने-मरोडने और उसे ग़लत रंग देने में लगे हुए हैं।&lt;br /&gt;साभार पुस्तक ‘‘इतिहास के साथ यह अन्याय‘‘ प्रो. बी. एन पाण्डेय,मधुर संदेश संगम, अबुल फज़्ल इन्कलेव, दिल्ली-25 औरंगज़ेब जेब&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' 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Kairanvi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00958476404864434157</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SXlfeinhAII/AAAAAAAAAEA/oKeD8XaDgi4/S220/umarkairanvi1.jpg'/></author><thr:total>13</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7189779905817347363.post-4855855820346347980</id><published>2009-03-12T04:10:00.000-07:00</published><updated>2009-05-02T22:21:09.345-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='उमर कैरानवी'/><title type='text'>उमर कैरानवी हिन्दी समाचारपत्रों में</title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/Sbjt7ptKrKI/AAAAAAAAAIk/Kc3E0iT0PM0/s1600-h/kairana-book.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5312257369546861730" style="WIDTH: 230px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px" alt="" 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/&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SeXOy0yoPOI/AAAAAAAAAKE/h1mIQhI0oeU/s1600-h/amanat-news.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5324889506995256546" style="WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 370px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SeXOy0yoPOI/AAAAAAAAAKE/h1mIQhI0oeU/s400/amanat-news.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SeXOy7NJmXI/AAAAAAAAAKM/RMTMfxmjWeA/s1600-h/aqurandotcomumarnews1.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5324889508717107570" style="WIDTH: 356px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SeXOy7NJmXI/AAAAAAAAAKM/RMTMfxmjWeA/s400/aqurandotcomumarnews1.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/Sbjsji4p69I/AAAAAAAAAIc/oBKJMUiK1-Y/s1600-h/new-naik-sahafat.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5312255855887510482" style="WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 239px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/Sbjsji4p69I/AAAAAAAAAIc/oBKJMUiK1-Y/s320/new-naik-sahafat.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SbjsjWi4oyI/AAAAAAAAAIU/0UIs1x8FJC4/s1600-h/new-naik-saeban.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5312255852574974754" style="WIDTH: 162px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SbjsjWi4oyI/AAAAAAAAAIU/0UIs1x8FJC4/s320/new-naik-saeban.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SbjvifI0iCI/AAAAAAAAAIs/gI9H8lmsQ4U/s1600-h/umar-hamarasamaj.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5312259136236587042" style="WIDTH: 190px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SbjvifI0iCI/AAAAAAAAAIs/gI9H8lmsQ4U/s320/umar-hamarasamaj.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7189779905817347363-4568467526525391458?l=meratajarba.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://meratajarba.blogspot.com/feeds/4568467526525391458/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7189779905817347363&amp;postID=4568467526525391458&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7189779905817347363/posts/default/4568467526525391458'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7189779905817347363/posts/default/4568467526525391458'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://meratajarba.blogspot.com/2009/03/blog-post.html' title='عمر کیرانوی اردو اخباروں میں उमर कैरानवी उर्दू समाचारपत्रों में'/><author><name>Umar Kairanvi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00958476404864434157</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SXlfeinhAII/AAAAAAAAAEA/oKeD8XaDgi4/S220/umarkairanvi1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/TAypp0q6JWI/AAAAAAAAAP8/EYoo3clElY0/s72-c/scan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7189779905817347363.post-5173977636907861232</id><published>2009-02-11T21:55:00.000-08:00</published><updated>2009-02-20T14:04:10.902-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='उर्दू युनिकोड'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='हिन्दी यूनीकोड'/><title type='text'>Urdu Unicode Solution</title><content type='html'>&lt;strong&gt;can't see&lt;/strong&gt; hindi text, install leguage pack:Insert XP-cd:Goto Control Panel -&gt; Regional and Language Options\Goto Languages tab in Regional and Language Options dialog\Check the Install files for complex script and right-to-left languages (including Thai) checkbox\Click Apply to complete installation --&lt;br /&gt;&lt;a href="http://unicomtech.blogspot.com/2007/07/how-to-configure-windows-vista-to-take.html"&gt;help for vista&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://www.raftaar.in/faq.htm"&gt;http://www.raftaar.in/faq.htm&lt;/a&gt;-Then you will read my article &amp;amp; will see hindi websites.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;اردو ٹیکسٹ میں ای میل کرنا&lt;br /&gt;اردو یونی کوڈ اردو ٹیکسٹ میں، ای میل کرنا،گوگل میں سرچ کرنا،بلاگنگ اور بیشترویب سائٹوں میں یونی کوڈ کااستعمال ہورہاہے۔چونکہ اس کی فائلیں بہت کم جگہ لیتی ہیں۔ اس لئے استفادہ کرنے والے اخبار رسائل میٹرکو اپنے محدود spaceمیں زیادہ دنوں تک رکھ سکتے ہیں۔اب یونی کوڈآسانی سے اپنایا جاسکتاہے۔کچھ طریقے مندرجہ ذیل ہیں: xpکے میں اردویونی کوڈ کی سہولت پہلے سے ہی ہوتی ہے۔ control pannelمیں reginal settingمیں thai lenguageوالا باکس آن کرلیں aplyکرنے سے پہلے Xp-CD لگالیں تو بہتر ہے پھراوہر کی ٹیپ سے کی بورڈ ایڈ کرلیں۔لینگویج بار آپ کے سامنے ہوگی جب جہاں چاہیں اردو لکھیں جب چاہیں انگلش لکھیں۔ Phonetic Key board کے جانکاروں کے لئے یونی کوڈ میں بہت سی آسانیاں ہیں،Phonetic کا کی بورڈ سافٹ ویئر بھی آسانی سے ڈاون لوڈ کرسکتے ہیں۔نئے لوگوں کوPhoneticکی بورڈ ہی استعمال کرنا چاہےے۔ فونیٹک کی بورڈ پر آن لائن بھی ہے جس پر آپ کی بورڈ سے یا ماس سے بھی کمپوز کرسکتے ہیں۔www.urdukeyboard.com ویب سائٹ پر Phonetic Key board میں آن لائن ٹائپنگ کرسکتے ہیں،جسے کاپی کرکے ای میل ،بلاگ یا پھرویب سائٹ میں پیسٹ کرسکتے ہیں۔ urdu unicode solution نام کا سافٹ ویئرتوبس یوں کہہ لیں کہ خدائی مدد ہے۔ اُردو یونی کوڈ سولوشن سافٹ ویئر کے ذریعے ان پیج سافٹ ویئر کا کمپوز میٹر یونی کوڈ میں بدل سکتے ہیں اوراسی کے ذریعہ کسی ویب سائٹ کے یونی کوڈ میٹر کو اِن پیج ٹیکسٹ میں بھی بدل سکتے ہیں۔ اِس کے ایک باکس میں یونی کوڈ ڈالو دوسرے دوسرے میں جو ٹیکسٹ آتاہے اُسے اپنی مطلوبہ شکل میں استعمال کرسکتے ہیں۔ انتہائی خوشی کی بات یہ کہ xpپر دیکھنے والے کوزبانی پروگرام بھی انسٹال نہیں کرناہوتاجبکہ ہندی کی ویب سائٹ کو پڑھنے کے لےے لازمی انسٹال کرنا ہوتاہے۔ آفتاب کی بورڈجسے بی بی سی اردو نے اپنایاہے۔پرانے لوگ اسی کی بورڈ پر کام کرتے آئے ہیں، جو کاتب،شاہکار،صفحہ ساز جیسے سافٹ ویئروں کا کامن کی بورڈ رہا ہے اورآگے بھی کسی نئے سافٹ ویئر کا کی بورڈ ہونے کے قوی امکان ہیں۔یہ مجھے آن لائن تو نہیں مل سکامگر میرے پاس ہے اِس میں جلد ہی اِسے آن لائن کروں گا،ابھی تجربہ کے مراحل میں ہے۔آفتاب کی بورڈ بی بی سی پر یہ آن لائن بھی دیکھا جاسکتاہے۔بی بی سی اردو کے ”ہمیں لکھئے سیکشن“ میں ایک دو لائن لکھ کر وہاں سے ماؤس کے ذریعہ( Control+Cکا استعمال نہ کریں) copy کرکے اپنے ای میل وغیرہ میں پیسٹ کرسکتے ہیں۔ ان پیج سافٹ ویئر۔۳،میں سبھی کی بورڈ کے ساتھ اردو یونی کوڈ میں لکھا جاسکتاہے۔ اِسے یونی کوڈ کی ضرورتوں کو دیکھتے ہوئے تیار کیاگیا۔ائنٹرنیٹ پرابھی اِس کے ڈیمو دیکھ سکتے ہیں۔ ہندی،اُردو یونی کوڈایڈٹ کرنے کے لےے کسی سافٹ ویئر کے ڈاون لوڈ کرنے سے پہلے ایکس پی میںreginal setingمیں لینگویج پیک کوwindow-xp Cdسے انسٹال کرلیں تو بہتر ہے۔&lt;a href="http://www.4shared.comسے/"&gt;http://www.4shared.comسے/&lt;/a&gt; معروف پروگراموں کے علاوہ اُردو کے تقریباً سبھی سافٹ ویئر ڈاؤن لوڈکیے جاسکتے ہیں۔&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7189779905817347363-5173977636907861232?l=meratajarba.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://meratajarba.blogspot.com/feeds/5173977636907861232/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7189779905817347363&amp;postID=5173977636907861232&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7189779905817347363/posts/default/5173977636907861232'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7189779905817347363/posts/default/5173977636907861232'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://meratajarba.blogspot.com/2009/02/urdu-unicode-solution.html' title='Urdu Unicode Solution'/><author><name>Umar Kairanvi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00958476404864434157</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_Jvbsb1h9yMw/SXlfeinhAII/AAAAAAAAAEA/oKeD8XaDgi4/S220/umarkairanvi1.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7189779905817347363.post-4641372360875944682</id><published>2009-02-05T09:31:00.000-08:00</published><updated>2010-12-08T01:29:32.190-08:00</updated><title type='text'>हिन्दी युनिकोड हेतु मेरी समस्याओं और समाधान की यात्रा</title><content type='html'>&lt;span style="font-size: 130%;"&gt;can't see hindi text&lt;/span&gt;,&lt;br /&gt;install language pack: Insert XP-cd:Goto Control Panel -&amp;gt; Regional and Language Options\Goto Languages tab in Regional and Language Options dialog\Check the Install files for complex script and right-to-left languages (including Thai) checkbox\Click Apply to complete installation&lt;br /&gt;--&lt;a href="http://unicomtech.blogspot.com/2007/07/how-to-configure-windows-vista-to-take.html"&gt;help for vista&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://www.raftaar.in/faq.htm"&gt;http://www.raftaar.in/faq.htm&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;-Then you will read my article &amp;amp; will see hindi websites.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्यों? कैसे और कितना सीखा&lt;br /&gt;स्‍थानीय समाचार पत्र के संवाददाता के लेख चाहने पर अपनी वेबसाइट बता देता था, जिसपर लेख चित्र के रूप में होते जिसके कारण जिन्हें छापने या अपनी वेबसाइट में देने के लिए उन्हें फिर से कम्पोज और प्रूफ करना होता था। ऐसी अनेक समस्याओं का समाधान मुझे युनिकोड में नज़र आया। युनि‍कोड सीखने के लिय गूगल पर सर्च करने पर ज्ञात हुआ कि विन्डो एक्सपी में हिन्दी युनिकोड की सुविधा उपलब्ध होती है जिसका कीबोर्ड अलग होता है जो नये सीखने वालों के लिए सर्वोत्‍तम उपाय है। मगर मैं तो रेमिंगटन कीबोर्ड जानता हूं जिसे अधिकतर पुराने लोग जानतें हें। क्योंकि मेरे बहुत से लेख कृतिदेव फोंट में थे सोचा पहले जो कम्पोज़ उसे युनिकोड में परिवर्तित करलूं इसलिए उन्हें यूनिकोड फ़ोण्ट &lt;span class=""&gt;परिवर्तित्र&lt;a href="http://technical-hindi.googlegroups.com/web/Unicode-to-krutidev010+converter05.htm?gda=jrqWKlgAAACvU6A81ce-VK-7mMsEVyXzn0H4aNSO1k4L8_jiRKAPPlFpn2p4dqFyrBv_aLL4HyMGsoK730gK0BvsdXSMEmptQSUx-b5VnCskJ7iVMxldMBo1YHcDYvgcK1MwRk9oTs4"&gt;http://technical-hindi.googlegroups.com/web/Unicode-to-krutidev010+converter05.htm?gda=jrqWKlgAAACvU6A81ce-VK-7mMsEVyXzn0H4aNSO1k4L8_jiRKAPPlFpn2p4dqFyrBv_aLL4HyMGsoK730gK0BvsdXSMEmptQSUx-b5VnCskJ7iVMxldMBo1YHcDYvgcK1MwRk9oTs4&lt;/a&gt;&lt;/span&gt; ओनलाइन सुविधा जो कि जिसका लिंक गूगल ग्रूप technical-hindi.googlegroups dot com से मिला, यहॉ कई फोन्ट के परिवर्तक लिंक उपलब्ध हैं से युनिकोड में कर लिया। इसमें एक बाक्स में &lt;a href="http://technical-hindi.googlegroups.com/web/Krutidev010+to+Unicode+to+Kritidev010+Font+Converter_01.htm?gda=OtHGIG0AAACQH9vJztoMqnBOz3Z4MVUz6Y1g01u8ezzkvAdE2jU5RLkms7VanuLWBKh_fS8v3El_CRPtJaov3iE0bU9mNCdweMkwS8KNIu1qEIoS8x_1w2-RXITE3UF_GnCON-gYEnjlNv--OykrTYJH3lVGu2Z5"&gt;कृतिदेव फोंट का टेक्सट डालो दूसरे बाक्स में युनिकोड हो जाता &lt;/a&gt;है। मगर इसमें कुछ त्रूटियां हो जाती है। जैसे मॉागने, ,जहाॅ, सर्वाेउत्तम शब्‍दों के बीच में डब्बा बना मिलेगा और चंद्रा बिन्दी ॅ को डबल कर देने जैसी बाते होती हैं जिनके लिए अब इस युनिकोड को दूसरी वेब में पेस्ट किया, &lt;a href="http://technical-hindi.googlegroups.com/web/Remington-AK.htm?gda=ZBXeJkIAAAB5GQhwRali8B9ssXJex9cyOJrOJZE52SyVEVCA3n8qK-4Mdi3G2tLhMPxqBxomgUxV4u3aa4iAIyYQIqbG9naPgh6o8ccLBvP6Chud5KMzIQ"&gt;यहॉ पर रेमिंगटन कीबोर्ड में लिख सकते हैं कीबोर्ड भी आनलाईन दिखाई देता &lt;/a&gt;है।&lt;br /&gt;&lt;a href="http://technical-hindi.googlegroups.com/web/Urdu+se+Hindi+anuvadak_01.htm?gda=9lcluU8AAAB5GQhwRali8B9ssXJex9cy3ylcVWGYxQeJ_HtyaKwo3qsy9Qk0UZHpMoZptrGI0y6bJb-UofLrXpDcBakYNxI1nHMhSp_qzSgvndaTPyHVdA"&gt;उर्दू से हिन्दी अनुवादक &lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://www.rajasthanonline.org/Admin/converters/Unicode-to-krutidev010+converter05.htm"&gt;यूनिकोड से कृतिदेव०१० फ़ोण्ट परिवर्तित्र &lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://quillpad.in/hindi/"&gt;रोमन टाइप करने से हिन्‍दी&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;लेख में नई बातें लिखने के यहॉं यह समस्या आई कि जो कीबोर्ड में है वही लिख सकते हैं जैसे हृ द्द अर्थात जिस शब्द में डबल &lt;a href="" name="Conjuncts"&gt;Conjuncts&lt;/a&gt; आया वह कैसे लिखें। इस समस्या के लिए बहुत से हिन्दी ब्लाग जैसे raviratlami.blogspot dot com &amp;amp; blogg.raftaar dot in इत्‍यादी के अनेक लेख पढ़ने पर यह हल समझ में आया कि माईकरोसाफ्ट द्वारा प्रस्तुत &lt;a href="http://www.bhashaindia.com/"&gt;bhashaindia dot com &lt;/a&gt;पर &lt;a href="http://www.bhashaindia.com/Downloadsv2/ListCategories.aspx"&gt;hindi IMe &lt;/a&gt;&lt;a href="http://www.bhashaindia.com/Developers/IndianLang/Typingdnagari/dnpages.aspx?pl=1"&gt;&lt;/a&gt;उपलब्ध साफटवेयर प्रयोग किया जाए। इसमें कई कीबोर्ड होते हैं इसके द्वारा आफलाइन काम किया जा सकता है यह बहुत अच्छा साफटवेयर है इसका Akurti कीबोर्ड प्रयोग करके फिर अपनी post ऐडिट करना आरम्भ किया इसमे डबल शब्दों को शार्टकटस का प्रयोग करके टाइप किया जा सकता है । रेमिंगटन कीबोर्ड के जानकारों के लिये यही उपयुक्‍त है । जो शब्द इन शार्टकटस जो कि हेल्प में देखे जा सकते हैं या वह जो इसमें नहीं बन पाये लगभग सभी &lt;a href="http://www.omniglot.com/writing/devanagari_conjuncts.php"&gt;Devanāgarī conjunct consonants &lt;/a&gt;इस &lt;a href="http://www.omniglot.com/writing/devanagari_conjuncts.php"&gt;साईट&lt;/a&gt; से कापी करके अपना शब्द पूर्ण किया जा सकता हैं। एक नई पोस्ट को कम्पोज कर रहा था कि उसमें शब्द राष्ट्रीय लिखना था। अब यह नई समस्या कि तीन conjunct से बना शब्‍द कैसे लिखूं? बहुत खोजने पर भी जब कोई हल नज़र ना आया तो एक युक्ति काम कर गयी। सोचा कि गूगल की अनुवाद सुविधा में अनुवाद युनिकोड में होता है। इंगिलश में National लिखकर अनुवाद किया तो राष्ट्रीय शब्द मिल गया उसे कोपी करके अपने लेख में ले आया। &lt;a href="http://freenet-homepage.de/prilop/sanskrit-alphabet.html"&gt;The Sanskrit alphabet &lt;/a&gt;के ष्ट्र, श्च्य और आधी फ के साथ (फ्फ) इस साईट से कापी करके प्रयोग किये जा सकते हैं। विश्लेषन, अश्विनी जैसे शब्‍दों का भी ऐसा ही हल है।&lt;br /&gt;&lt;a href="http://www.download.com/HindiWriter/3000-2279_4-10451513.html"&gt;हिन्‍दी राईटर साफ्टवेयर&lt;/a&gt; बहुत पसंद किया जा रहा है मेरे तजुर्बा है कि यह फोनेटिक की बोर्ड का होने के कारण नये यूजर के लिये अच्‍छा रहेगा पुराने लोग इसको अपनी हिन्‍दी युनिकोड स्‍पेलिंग के लिये भी प्रयोग कर रहे हैं। &lt;a href="http://www.jitu.info/merapanna/?p=637"&gt;विन्डोज लाइव राइटर &lt;/a&gt;के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है उसे पढ़कर लगता है कि &lt;a href="http://www.bhashaindia.com/Downloadsv2/ListCategories.aspx"&gt;hindi IMe &lt;/a&gt;ही ठीक है&lt;br /&gt;मेरा तो युनिकोड की समस्याओं और समाधान का सफर जारी है समय मिला तो इस पोस्‍ट को फिर एडिट करूंगा, साथ साथ &lt;a href="http://meratajurba.blogspot.com/2009/01/blog-post_29.html"&gt;उर्दू युनिकोड &lt;/a&gt;का सफर भी जारी है ।&lt;br /&gt;बाकी फिर कभी ।&lt;br /&gt;..............................................&lt;br /&gt;&lt;a href="http://technical-hindi.googlegroups.com/web/Unicode-to-krutidev010+converter05.htm?gda=IHSlmVgAAABK7OLuOm601guSX11NJCePQzFPoUFHW0bYPzE2U9yBjFFpn2p4dqFyrBv_aLL4HyMGsoK730gK0BvsdXSMEmptQSUx-b5VnCskJ7iVMxldMBo1YHcDYvgcK1MwRk9oTs4&amp;amp;gsc=5WHIMhUAAACjao_fecxrvATDIQ6hvrK4jO4N58dmGKaLh26-BunhFA"&gt;unicode to krutidev&amp;nbsp;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://technical-hindi.googlegroups.com/web/%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F+%E0%A4%AA%E0%A4%B0+%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%B2%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A7+%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80+%E0%A4%95%E0%A5%87+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A4%A8.htm?gda=hE-MFEABAACQH9vJztoMqnBOz3Z4MVUz0Si4bkcaK3KwB6ZT-apSbuNqDBv36UlxeOT5qv3jzX6R3gCQ3Zl_o3SDIRqno7F6lj61D2NAiDx7C4Nd1o-WD6mMtl91GKNQERtSLE8O1NAHAfaUecL1YIoUN5NjCX8RT56tG40ll1bPngbhNRLBjBbAtB4QGlWe7swJ7KkMYHBUsiBD1z7z4xqCjlezehfU9CujpOnWFkp7SBECXBdCze-muDKzVG5CJzrzGcpdo8W4c5isWgQ0mjSkol_8dxOv-7WktO_r4QF_leCbfZOEZbDqyzH3RHnVyFsOIh5XySjpnavBexGD9zNGCsVD1hKy5K0tS8QzJ_n0mcdTqDIqAvUodh_xn49Wo_4TQ7cu20ko3Jo7OVqDTHysuXl900N6bcVT3VtYGKLco-_l-8AzjQ"&gt;हिन्‍दी &lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://groups.google.com/group/technical-hindi/files"&gt;हिन्‍दी&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;रोमन में लिखो हिन्दी हो जाएगी&lt;br /&gt;&lt;a href="http://quillpad.in/hindi/"&gt;http://quillpad.in/hindi/&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://http//www.cgpi.org/pages/corepages/download.aspx"&gt;डाउनलोड कुर्तिदेव फ़ॉन्ट 010&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;usefull &lt;a href="http://softwaresection.blogspot.com/2008/12/urdu-inpage-2005-professional.html"&gt;software link&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7189779905817347363-4641372360875944682?l=meratajarba.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://meratajarba.blogspot.com/feeds/4641372360875944682/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7189779905817347363&amp;postID=4641372360875944682&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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